संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सेना को खराब गोला-बारूद की आपूर्ति और आर्टिलरी गन्स की खरीद में लंबे समय से चली आ रही देरी पर चिंता जताई है। PAC की 49वीं रिपोर्ट में सामने आया कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सप्लाई किए गए दोषपूर्ण गोला-बारूद को बदलने के कारण करीब 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। समिति ने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल सरकारी धन का नुकसान करती हैं, बल्कि सेना के गोला-बारूद भंडार की विश्वसनीयता और ऑपरेशनल तैयारियों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
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आर्टिलरी गन्स की खरीद में दशकों की देरी पर चिंता
PAC ने आधुनिक आर्टिलरी गन्स की खरीद में हुई लंबी देरी को भी सेना की युद्धक क्षमता के लिए गंभीर चुनौती बताया। भारत ने 1986 में बोफोर्स से 155mm/39 कैलिबर तोपें खरीदी थीं और इसके साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी हुआ था। इसके बाद नई और अधिक क्षमता वाली तोपों की खरीद के प्रयास शुरू हुए, लेकिन आवश्यकताओं को अंतिम रूप देने में देरी और विक्रेताओं से सीमित प्रतिक्रिया के कारण प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। समिति के अनुसार, रक्षा मंत्रालय को नई तोप प्रणाली खरीदने और सेना में शामिल करने में लगभग दो दशक लग गए। इस देरी के कारण सेना को लंबे समय तक सीमित फायरपावर वाली पुरानी तोपों पर निर्भर रहना पड़ा।
समिति ने स्वदेशी 155mm/45 कैलिबर धनुष तोप परियोजना को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना, लेकिन इसके उत्पादन में हुई देरी पर नाराजगी भी जताई। PAC के मुताबिक, भारत में पहले इस स्तर की एडवांस तोप का निर्माण नहीं होने के कारण उत्पादन प्रक्रिया को विकसित करने में काफी समय लगा। मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर भी परियोजना की जरूरतों के अनुरूप तैयार नहीं था। इसके अलावा बैलिस्टिक विशेषज्ञता, गन इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड साइटिंग सिस्टम को एकीकृत करने से जुड़ी तकनीकी कमियों ने भी उत्पादन की गति प्रभावित की।
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डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए विशेष कोर्स शुरू करने का सुझाव
PAC ने रक्षा उत्पादन क्षेत्र में कुशल कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए IITs और अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया है। समिति ने डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स के कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण और अपस्किलिंग पर भी जोर दिया, ताकि भारतीय रक्षा उद्योग वैश्विक तकनीकी मानकों के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित कर सके। PAC ने माना कि धनुष तोप में बोफोर्स के कई पार्ट्स की समानता ने रखरखाव को आसान बनाया है, लेकिन उत्पादन में लगातार हुई देरी ने आर्टिलरी यूनिट्स की ऑपरेशनल तैयारियों पर असर डाला।
धनुष परियोजना की निगरानी उच्च स्तर पर होने के बावजूद कई उत्पादन समयसीमाएं पूरी नहीं हो सकीं। PAC ने अब मार्च 2027 तक बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की सिफारिश की है। समिति ने एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) से संभावित बाधाओं की पहले पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए सक्रिय रणनीति अपनाने को कहा है। रिपोर्ट ने साफ किया कि दोषपूर्ण गोला-बारूद से हुआ 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान और आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम हासिल करने में दशकों की देरी रक्षा प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है।
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