मध्य पूर्व में हफ्तों से जारी जंग के बीच अब एक नई और गंभीर प्राकृतिक चुनौती सामने आ गई है। क्षेत्र पर एक दुर्लभ और शक्तिशाली मेगा स्टॉर्म का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में 100 से 500 मिमी तक भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ की चेतावनी जारी की है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है।
नई दिल्ली: जंग से जूझ रहे मिडिल ईस्ट के सामने अब प्रकृति का खतरा खड़ा हो गया है। एक असामान्य और शक्तिशाली मौसम प्रणाली आज से ही असर दिखाना शुरू कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और इसका प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिणी ईरान, पूर्वी इराक और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आमतौर पर गर्म और शुष्क रहने वाले इस क्षेत्र में इस बार बेहद असामान्य मौसम देखने को मिल सकता है। कई मौसम मॉडलों ने संकेत दिया है कि अगले 72 घंटों में 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है। यह मात्रा कई इलाकों के वार्षिक औसत से भी अधिक है, जिससे अचानक बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
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जंग के बीच मिडिल ईस्ट पर मौसम का कहर, भारी बारिश और बाढ़ से बढ़ा संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तूफान गुरुवार और शुक्रवार को अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसकी मुख्य वजह मिस्र और सऊदी अरब के ऊपर बना गहरा ट्रफ, भूमध्यसागर से आ रही नमी से भरी हवाएं और इटली की ओर से विकसित हो रहा एक शक्तिशाली वेदर सिस्टम है। इन सभी कारकों के टकराव से यह मेगा स्टॉर्म और अधिक तीव्र हो सकता है।
दुबई समेत खाड़ी क्षेत्र के बड़े शहर इस खतरे के केंद्र में हैं। अनुमान है कि यहां 24 से 48 घंटों के भीतर 76 से 152 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। अबू धाबी, शारजाह और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़, तेज हवाओं और समुद्री हलचल का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा रेगिस्तानी इलाकों में दुर्लभ टॉरनेडो, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।
इससे पहले भी मिडिल ईस्ट ऐसे चरम मौसम की मार झेल चुका है। अप्रैल 2024 में यूएई में 75 साल की सबसे भारी बारिश दर्ज की गई थी, जिसने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया था। इसी तरह 2019 में ईरान, इराक और सीरिया में आई भीषण बाढ़ और 2022 में जेद्दा में कुछ ही घंटों में हुई रिकॉर्ड बारिश ने बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया था। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ता शहरीकरण ऐसे ‘एक सदी में एक बार’ होने वाले तूफानों को अब अधिक सामान्य बना रहा है।
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