मध्य पूर्व के समुद्री इलाकों में एक ऐसे “अदृश्य हथियार” का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे जहाज़ों की नेविगेशन प्रणाली प्रभावित हो रही है। इसे जीपीएस जैमिंग कहा जाता है। इस तकनीक के कारण जहाज़ों की वास्तविक लोकेशन बदलकर गलत दिखाई देने लगती है। समुद्री एआई कंपनी विंडवर्ड की सीनियर मरीन इंटेलिजेंस एनालिस्ट मिशेल वीज़ बॉकमैन ने जब ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में जहाज़ों की लाइव लोकेशन देखी तो उन्हें असामान्य गतिविधियां दिखाई दीं। नक्शे पर कई जहाज़ अजीब गोल समूहों में दिखाई दे रहे थे, जबकि कुछ जहाज़ तो जमीन के ऊपर मौजूद दिख रहे थे।
दरअसल जहाज़ सामान्य परिस्थितियों में इस तरह एकदम सटी हुई गोल आकृतियों में इकट्ठा नहीं होते। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा तब होता है जब जीपीएस सिग्नल में जानबूझकर हस्तक्षेप किया जाता है। जीपीएस जैमिंग के दौरान तेज़ रेडियो सिग्नल भेजकर असली जीपीएस सिग्नल को दबा दिया जाता है। इसके कारण मोबाइल फोन, जहाज़, ड्रोन या विमान अपनी सटीक लोकेशन नहीं पहचान पाते। कई बार उनकी लोकेशन बिल्कुल गलत दिखने लगती है या फिर सिस्टम को कोई सिग्नल ही नहीं मिलता।
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास सैकड़ों जहाज़ गलत मध्य स्थान पर दिखे
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल बम और गोलियों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीकें भी युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। जीपीएस जैमिंग जैसी तकनीकें दुश्मन को भ्रमित करने, सैन्य गतिविधियों को छिपाने और रणनीतिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। हालांकि इसका प्रभाव केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। समुद्र में चल रहे व्यापारिक जहाज़ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे व्यस्त समुद्री मार्गों में यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है। यदि जहाज़ों की लोकेशन गलत दिखाई दे, तो टकराव या नेविगेशन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जीपीएस जैमिंग की घटनाएं बढ़ती रहीं, तो वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।
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