Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब और तेज हो गया है। प्रवक्ता ने बताया कि ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत ईरानी बलों ने जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती दो दिनों में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। IRGC ने इस अभियान को निर्णायक जवाब करार दिया।
प्रवक्ता ने कहा कि ईरानी सेना ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि मिसाइल और ड्रोन हमलों से कई ठिकानों की क्षमता प्रभावित हुई। जनरल नैनी ने कहा कि हमलों ने अमेरिकी बलों को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अपने रणनीतिक लक्ष्यों को साधा।
ईरान-अमेरिका टकराव तेज: IRGC का भारी नुकसान का दावा
जनरल नैनी के अनुसार, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर भी प्रहार किया। United States Fifth Fleet को हुए नुकसान का आकलन जारी है। ईरान ने कहा कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में अमेरिकी संचालन प्रभावित हुआ। अमेरिकी पक्ष ने इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
IRGC ने यह भी दावा किया कि ईरानी नौसैनिक बलों ने चाबहार तट से 250 से 300 किलोमीटर दूर तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत पर मिसाइलें दागीं। प्रवक्ता के अनुसार, हमले में चार क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से अमेरिकी नौसैनिक तैनाती पर दबाव बढ़ा। क्षेत्र में तनाव के कारण समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
ईरान ने कहा कि उसके हमले सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए। अधिकारियों ने दावा किया कि लक्ष्यों का चयन सैन्य महत्व को ध्यान में रखकर किया गया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य रणनीतिक संतुलन स्थापित करना है। क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हालात पर चिंता जताई है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से अस्थिरता का जोखिम बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है और आगे की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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