म्यांमार भूकंपों के लिहाज़ से एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां अक्सर मध्यम और तीव्र तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं. हाल ही में, 1 जुलाई को 135 किलोमीटर की गहराई में रिक्टर स्केल पर 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. इससे पहले 28 मार्च को भी 7.7 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसने म्यांमार में भारी तबाही मचाई थी.
म्यांमार में सुबह महसूस किए गए तेज भूकंप के झटके, सतही केंद्र के कारण बढ़ा खतरा
म्यांमार में गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.1 मापी गई. भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग दहशत में आए गए और अपने घरों से बाहर आ गए. सड़कों पर लोगों के बीच अफरातफरी देखी गई. नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, गुरूवार सुबह 6.10 बजे आए भूकंप का केंद्र 10 किमी की उथली गहराई पर था. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने बताया भूकंप का केंद्र उथली गहराई पर था, जिससे यह आफ्टरशॉक के लिए अतिसंवेदनशील है. एनसीएस के मुताबिक, उथले भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं.
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देश में बार-बार भूकंप के झटके, मार्च के विनाशकारी भूकंप में 3500 से ज्यादा मौतें
बता दें कि म्यांमार मध्यम और बड़ी तीव्रता के भूकंपों के खतरों के प्रति संवेदनशील है. यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले 1 जुलाई को रिक्टर स्केल पर 4.2 तीव्रता का एक और भूकंप 135 किलोमीटर की गहराई पर आया था. इसी साल 28 मार्च को 7.7 तीव्रता के भूकंप ने म्यांमार में भीषण तबाही मचाई थी. इस भूकंप में 3500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. भूकंप का केंद्र मेंडले और सेगेंग शहरों की सीमा पर जमीन के 10 किलोमीटर भीतर था. भूकंप के चलते बुनियादी ढांचे, सड़कें और रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान हुआ. भूकंप के झटके न सिर्फ म्यांमार बल्कि पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए.


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