उत्तराखंड में LAC के पास भारत के साथ चल रहे युद्ध अभ्यास पर चीन की आपत्ति को खारिज करते हुए अमेरिका ने कहा कि ‘इससे उनका कोई लेना-देना’ नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय ने उत्तराखंड के औली में जारी ‘युद्ध अभ्यास’ का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह अभ्यास वर्ष 1993 और 1996 में चीन और भारत के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है।
भारत-अमेरिका संबंध अहम-जोंस
नयी दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की नवनियुक्त प्रभारी, राजदूत एलिजाबेथ जोंस ने कहा कि वाशिंगटन का हित नयी दिल्ली के प्रयासों में सहयोग करने में है, ताकि भारत अधिक सक्षम देश बन सके। जोंस ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अमेरिका के लिए सबसे अहम संबंधों में से एक हैं और वाशिंगटन दोनों पक्षों के बीच रक्षा तकनीक और जलवायु परिवर्तन समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं देखता है।
उत्तराखंड में जारी भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास को लेकर चीनी आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर जोंस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं इस संबंध में अपने भारतीय सहयोगियों के बयान को दोहराऊंगी कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। ’
चीन ने युद्ध अभ्यास पर जताया था विरोध
इससे पहले, बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने उत्तराखंड के औली में जारी ‘युद्ध अभ्यास’ का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह अभ्यास वर्ष 1993 और 1996 में चीन और भारत के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है।
किसी तीसरे देश को दखल देने का हक नहीं-भारत
चीनी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बृहस्पतिवार को मीडिया से कहा था, ‘औली में सैन्य अभ्यास का वर्ष 1993 और वर्ष 1996 में हुए समझौतों से कोई लेना-देना नहीं है।’ उन्होंने कहा कि भारत जिससे चाहे उसके साथ सैन्य अभ्यास कर सकता है और वह इस मामले में किसी तीसरे देश को ‘वीटो’ नहीं देता। भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्धाभ्यास’ एलएसी से 100 किलोमीटर दूर औली में किया जा रहा है।


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