April 23, 2026

Central Times

Most Trusted News on the go

40

40 दिन बाद सीजफायर, पहले 24 घंटे में ही बिगड़े हालात

40 दिन बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान ने बुधवार को 10 सूत्रीय युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद हालात बदल गए। इजरायल ने रातभर लेबनान के कई इलाकों, खासकर बेरूत के रिहायशी और कारोबारी क्षेत्रों पर हमला किया। इन हमलों में करीब 200 लोगों की मौत और हजार से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ गया।

इजरायल का कहना है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था, इसलिए उसने वहां कार्रवाई जारी रखी। हालांकि, ईरान और पाकिस्तान का दावा है कि 40 दिन के युद्धविराम की शर्तों में लेबनान में लड़ाई रोकना भी शामिल था। इसी वजह से समझौते को लेकर दोनों पक्षों में बड़ा मतभेद सामने आया है।

Also Read: जयपुर मेट्रो फेज-2 मंजूर, 41 किमी ड्राइवरलेस रूट से सफर आसान

40 दिन बाद युद्धविराम पर फिर बढ़ा तनाव

लेबनान पर हमले के तुरंत बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर बंद कर दिया। ईरान ने संकेत दिया कि वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका ने इस कदम का विरोध किया और जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की मांग की।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि होर्मुज को बंद करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं लेबनान ने हमलों के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित कर दिया। देश में सरकारी दफ्तर बंद रहे और झंडे झुका दिए गए।

इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर ने दावा किया कि ईरान ने उनके ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ऐसे में युद्धविराम के टिके रहने पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

बाजार और राजनीति पर भी दिखा असर

युद्धविराम की घोषणा के बाद शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में राहत दिखी थी। बीएसई सेंसेक्स में करीब 3.95 फीसदी की तेजी आई थी, जबकि जापान के निक्केई 225 में लगभग 6 फीसदी का उछाल देखा गया। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज हुई थी।

हालांकि, लेबनान पर हमले और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद बाजार की धारणा फिर कमजोर पड़ गई। गुरुवार को सेंसेक्स में 900 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई।

इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर उनका देश ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करेगा। वहीं अमेरिका में भी इस समझौते की शर्तों को लेकर भ्रम बना हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि इस समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया गया था।

Also Read: एमपी में गेहूं खरीद टली: किसानों पर असर और वजह क्या?