अंतरिक्ष से जीवन तक: सुनीता विलियम्स का बदला हुआ नज़रिया
भारतीय मूल की नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स कहती हैं कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखना इंसान की सोच को पूरी तरह बदल देता है। नासा में 27 साल के करियर और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 600 से अधिक दिन बिताने के बाद रिटायर हुईं सुनीता बताती हैं कि ऊपर से देखने पर सीमाएं, झगड़े और मतभेद अपनी अहमियत खो देते हैं। हाल ही में केरल साहित्य महोत्सव में भाग लेने भारत आईं सुनीता ने कहा कि अंतरिक्ष में बिताए गए समय ने उनके भीतर मानवता, सहानुभूति और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को और गहरा किया।
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भारत से जुड़ाव और झुलासन लौटने की इच्छा
सुनीता विलियम्स ने भारत से अपने गहरे रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा कि वह गुजरात स्थित अपने पैतृक गांव झुलासन जरूर जाएंगी। उन्होंने बताया कि हर भारत यात्रा में वह देश को बदले हुए रूप में देखती हैं—बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज़ तकनीकी विकास और विज्ञान के प्रति बढ़ता उत्साह। भारत की युवा प्रतिभा और संभावनाओं की तारीफ करते हुए सुनीता ने कहा कि एआई और तकनीक भारत के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती हैं, लेकिन वे इंसानी सोच और निर्णय का विकल्प नहीं बन सकतीं। रिटायरमेंट के बाद वह परिवार के साथ समय बिताने, यात्रा करने और पहाड़ों पर चढ़ने को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं।
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