September 18, 2026

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GST अधिकारी

झूठी शिकायत बंद करने के लिए Rs 8 लाख रिश्वत, GST अधिकारी रंगे हाथ गिरफ्तार

बेंगलुरु में लोकायुक्त की टीम ने सेंट्रल GST अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने एक शिकायत को बंद करने के बदले 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की। टीम ने आरोपी को उसके कार्यालय में कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा। इस कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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8 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप

लोकायुक्त के मुताबिक, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7A के तहत की गई। टीम ने सेंट्रल GST, केंद्रीय सदन, कोरमंगला में कार्रवाई को अंजाम दिया। आरोपी की पहचान मोहित प्रताप सिंह के रूप में हुई है। वह सेंट्रल GST के साउथ डिवीजन-4, A-रेंज में सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात बताया गया है। पुलिस ने उसके साथ कथित बिचौलिए सलमान शेख को भी पकड़ा।

लोकायुक्त कार्यालय के अनुसार, सैयद जमीर के खिलाफ दर्ज कथित झूठी शिकायत को बंद करने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। आरोपी ने कथित तौर पर इसके लिए 8 लाख रुपये मांगे थे। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने रिश्वतखोरी पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पुलिस इंस्पेक्टर विजया कृष्णा और उनकी टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। अधिकारी को उसके चैंबर में कथित तौर पर रिश्वत लेते समय पकड़ा गया।

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धारवाड़ में भी बड़ी रिश्वतखोरी की कार्रवाई

लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारी और कथित बिचौलिए को हिरासत में लिया। टीम अब मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की है। जांच के दौरान रिश्वत की मांग और लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

इससे पहले कर्नाटक लोकायुक्त ने धारवाड़ में भी एक तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए तहसीलदार को पकड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने 33 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज बदलने के लिए रिश्वत मांगी थी। आरोप है कि अधिकारी ने कुल 1 करोड़ रुपये और एक एकड़ जमीन की मांग की थी। लोकायुक्त की लगातार कार्रवाई से राज्य में रिश्वतखोरी के मामलों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

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