साल 2026 में उपभोक्ताओं को मोबाइल और कंप्यूटर सहित कई डिजिटल उपकरण महंगे दामों पर खरीदने पड़ सकते हैं।
इस संभावित महंगाई का मुख्य कारण रैंडम एक्सेस मेमोरी यानी रैम की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी है।
अक्टूबर 2025 के बाद वैश्विक बाजार में रैम की कीमतें दोगुनी से अधिक बढ़ चुकी हैं।
इस बढ़ोतरी ने लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की उत्पादन लागत को प्रभावित किया है।
रैम कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और कई मेडिकल उपकरणों का आवश्यक हिस्सा होती है।
बिना रैम के कोई भी डिजिटल डिवाइस सही ढंग से काम नहीं कर सकता।
इसी वजह से रैम की कीमतों में बदलाव सीधे अंतिम उत्पाद की कीमत तय करता है।
डिमांड–सप्लाई गैप के चलते अक्टूबर 2025 के बाद दोगुनी से अधिक हुई रैम की कीमतें
विशेषज्ञ बताते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विस्तार रैम कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है।
इसके परिणामस्वरूप, एआई आधारित डेटा सेंटर्स को संचालन के लिए बड़ी मात्रा में हाई-परफॉर्मेंस रैम चाहिए।
इस बीच, दुनियाभर में एआई सेवाओं की बढ़ती मांग से डेटा सेंटर्स का तेज़ी से विस्तार हो रहा है।
इसी कारण, इन डेटा सेंटर्स ने रैम की वैश्विक मांग को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।
हालांकि, रैम निर्माता कंपनियां फिलहाल बढ़ती मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं।
नतीजतन, डिमांड और सप्लाई के बड़े अंतर ने रैम बाजार में गंभीर असंतुलन पैदा किया है।
अंततः, इस असंतुलन का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है और रैम लगातार महंगी हो रही है।
कंप्यूटर निर्माता साइबर पावर पीसी के जनरल मैनेजर स्टीव मेसन ने स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में रैम और अन्य कंपोनेंट्स की लागत कई गुना बढ़ गई।
मेसन के अनुसार, अब कंपनियां पहले की तुलना में लगभग 500 प्रतिशत अधिक लागत झेल रही हैं।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि निर्माता लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत वहन नहीं कर पाएंगे।
उनका मानना है कि अंततः कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डालेंगी।
नतीजतन, कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें निर्माताओं को खुदरा दाम बढ़ाने के लिए मजबूर करेंगी।
रैम महंगी होने से स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल डिवाइस के दाम बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यह असर केवल प्रीमियम डिवाइस तक सीमित नहीं रहेगा।
इसके अलावा, मिड-रेंज और बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन और कंप्यूटर भी महंगे हो सकते हैं।
इसी तरह, स्टोरेज डिवाइस और अन्य मेमोरी आधारित उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।
यदि मौजूदा रुझान जारी रहते हैं, तो परिणामस्वरूप 2026 में तकनीकी उपकरण और महंगे हो सकते हैं।
इसके चलते, आम उपभोक्ताओं की डिजिटल पहुंच और टेक्नोलॉजी एक्सेस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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