March 7, 2026

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मंजूर

कैबिनेट ने दुर्लभ धातुओं के लिए 7280 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज मंजूर किया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 19,919 करोड़ रुपये की चार बड़ी परियोजनाओं को मंजूर किया। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही 7,280 करोड़ रुपये की दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट निर्माण योजना शामिल है। इसके अलावा, पुणे मेट्रो विस्तार के लिए 9,858 करोड़, देवभूमि द्वारका-ओखा रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए 1,457 करोड़ और बदलापुर-कर्जत तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए 1,324 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट (REPM) निर्माण के लिए नई प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है, जिसमें लगभग 7,280 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जो पहले के 2,500 करोड़ रुपये के पैकेज से तीन गुना अधिक है। यह कदम चीन द्वारा कड़े निर्यात नियंत्रण लागू किए जाने के बीच उठाया गया है, जो वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी कच्चे माल का 60-70% और प्रोसेसिंग का 90% नियंत्रित करता है। योजना का उद्देश्य 1,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली एकीकृत विनिर्माण इकाइयों का निर्माण करना है, जिसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड से धातु, धातु से मिश्रधातु और अंततः तैयार स्थायी चुम्बक बनाने की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी। योजना की कुल अवधि 7 वर्ष है, जिसमें पहले 2 वर्ष में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

भारत ने दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया

दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में होता है, लेकिन भारत में सीमित फंडिंग और तकनीकी चुनौतियां हैं। बिना सरकारी समर्थन वाणिज्यिक उत्पादन मुश्किल है। सरकार सिंक्रोनस रिलक्टेंस मोटर्स और अन्य परियोजनाओं पर अध्ययन फंड कर रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। अप्रैल से चीन के कड़े निर्यात नियंत्रण के बाद भारत ने सप्लाई चेन विकसित करने की गति तेज कर दी है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 2,270 टन दुर्लभ पृथ्वी धातु आयात की, जिसमें 65% से ज्यादा चीन से आया।

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