बेंगलुरु के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस की जांच में एक चौंकाने वाला तकनीकी पहलू सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, 24 वर्षीय श्वेता और उसके 25 वर्षीय लिव-इन पार्टनर केनेथ ने कथित तौर पर श्वेता के माता-पिता और छोटी बहन की हत्या की साजिश रचने के दौरान AI टूल का इस्तेमाल किया था। आरोप है कि दोनों ने कई महीनों तक हत्या के तरीकों, वारदात की योजना और पुलिस जांच से बचने जैसे सवाल ऑनलाइन पूछे। जांच अधिकारियों को आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल के दौरान कथित तौर पर ऐसी सर्च और बातचीत से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। इस खुलासे के बाद यह मामला केवल एक जघन्य हत्याकांड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपराध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित दुरुपयोग और उससे जुड़े कानूनी सवालों को लेकर भी चर्चा में आ गया है।
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CCTV फुटेज से सामने आया आरोपियों का मूवमेंट
पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, 22 जून की रात श्वेता और केनेथ एक घर से बाहर निकलते हुए CCTV कैमरों में कैद हुए थे। आरोप है कि इससे कुछ समय पहले ही दोनों ने श्वेता की मां मुथुलक्ष्मी, पिता सोमा सुंदर और छोटी बहन सुप्रिया पर चाकू से हमला किया था। हमले के बाद आरोपी कथित तौर पर घर में मौजूद नकदी और आभूषण लेकर फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, हमले में गंभीर रूप से घायल सोमा सुंदर तत्काल नहीं मरे थे और किसी तरह घर से बाहर निकलने में सफल रहे। पड़ोसियों ने उन्हें घायल अवस्था में देखकर पुलिस को सूचना दी। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल ले जाने से पहले उन्होंने हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने श्वेता और केनेथ की तलाश शुरू की।
जांच में हत्या के पीछे आर्थिक विवाद और पारिवारिक तनाव की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि नौकरी जाने के बाद श्वेता ने अपनी मां से करीब 50 लाख रुपये लिए थे और कथित तौर पर उस रकम का बड़ा हिस्सा अपने लिव-इन पार्टनर पर खर्च कर दिया था। पुलिस इस एंगल की जांच कर रही है कि पैसे वापस करने के दबाव और परिवार से लंबे समय से चले आ रहे तनाव ने हत्या की साजिश को जन्म दिया या नहीं। पूछताछ के दौरान श्वेता ने कथित तौर पर अपनी मां पर उसकी जिंदगी को नियंत्रित करने और उसे स्वतंत्रता नहीं देने का आरोप भी लगाया। पुलिस के अनुसार, हत्या की योजना अचानक नहीं बनी थी, बल्कि दोनों आरोपी कथित रूप से करीब छह महीने से इसकी तैयारी कर रहे थे और इसी दौरान उन्होंने तकनीक की मदद से अलग-अलग जानकारियां जुटाईं।
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पुडुचेरी भागे आरोपी, पुलिस ने दोनों को दबोचा
वारदात के बाद श्वेता और केनेथ कथित तौर पर बाइक से बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में पहुंचे और बाद में अलग-अलग बसों से पुडुचेरी चले गए। उधर, गंभीर रूप से घायल सोमा सुंदर की भी अस्पताल में मौत हो गई, जबकि मुथुलक्ष्मी और सुप्रिया को पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस ने जांच और तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों की तलाश तेज की और पहले श्वेता को पुडुचेरी से हिरासत में लिया। इसके बाद केनेथ को भी वहीं से गिरफ्तार किया गया। दोनों को बेंगलुरु लाकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, इसी पूछताछ और उनके डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान कथित हत्या की योजना से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए, जिनमें AI टूल से पूछे गए सवाल भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच अधिकारियों ने आरोपियों के लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की पड़ताल की तो कथित तौर पर ऐसे सवालों का रिकॉर्ड मिला, जो हत्या की योजना और उसके बाद सबूत छिपाने से जुड़े थे। इसी वजह से इस मामले में AI की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हुई। हालांकि AI को अपराध का आरोपी बनाने की बात कानूनी रूप से बेहद जटिल है। मौजूदा भारतीय कानून में AI को किसी इंसान की तरह स्वतंत्र कानूनी व्यक्तित्व या आपराधिक मंशा रखने वाली इकाई नहीं माना जाता। ऐसे में किसी AI टूल पर सीधे हत्या का मुकदमा चलाना मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत संभव नहीं माना जाता। फिर भी जांच एजेंसियां संबंधित AI सेवा से उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी मांग सकती हैं, जो आरोपियों की योजना और मंशा साबित करने में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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