AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन इसके साथ नए खतरे भी सामने आने लगे हैं। बड़ी टेक कंपनियां ऐसे नए मॉडल तैयार कर रही हैं, जो भविष्य में साइबर हमलों को पहले से कहीं अधिक आसान और खतरनाक बना सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में AI आधारित टूल्स हैकर्स के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं।
अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों और सरकारी अधिकारियों ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि कई कंपनियां ऐसे एडवांस मॉडल लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं, जो जटिल सिस्टम में आसानी से सेंध लगा सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एंथ्रोपिक एक नए मॉडल Mythos पर काम कर रही है। यह मॉडल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह इसी साल बड़े स्तर पर साइबर हमलों की संभावना बढ़ा सकता है।
Mythos जैसे मॉडल AI एजेंट्स को इतना एडवांस बना देते हैं कि वे खुद फैसले ले सकते हैं, नई रणनीति बना सकते हैं और जटिल सिस्टम में कमजोरियों की पहचान कर सकते हैं। यही वजह है कि कई साइबर एक्सपर्ट्स इसे हैकर्स के लिए एक खतरनाक हथियार मान रहे हैं।
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AI मॉडल क्यों बन रहे हैं बड़ा खतरा?
टेक इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों का मानना है कि डेवलपर्स बिना पूरी सुरक्षा जांच के AI टूल्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं। इससे अनजाने में हैकर्स के लिए रास्ता आसान हो रहा है। पिछले साल भी कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीन से जुड़े साइबर ग्रुप्स ने AI एजेंट्स का इस्तेमाल करके कई ग्लोबल टारगेट्स को निशाना बनाया था। उस समय लगभग 90 प्रतिशत काम AI सिस्टम ने खुद ही पूरा किया था।
हालांकि, उस समय के AI टूल्स आज के मुकाबले कम शक्तिशाली थे। अब नए मॉडल पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। वे खुद सोच सकते हैं, जरूरत के अनुसार नई तकनीक अपना सकते हैं और बिना रुके लगातार काम कर सकते हैं। यही वजह है कि एक अकेला व्यक्ति भी इनकी मदद से बड़े पैमाने पर साइबर हमला कर सकता है।
Shadow AI और कंपनियों के लिए बढ़ता खतरा
कई बार कर्मचारी बिना अनुमति के AI टूल्स को कंपनी के अंदरूनी सिस्टम से जोड़ देते हैं। टेक इंडस्ट्री में इस स्थिति को Shadow AI कहा जाता है। यह स्थिति साइबर अपराधियों के लिए नया रास्ता खोल सकती है, क्योंकि इससे संवेदनशील डेटा लीक होने का खतरा बढ़ जाता है।
एक सर्वे के अनुसार, लगभग 48 प्रतिशत साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में एजेंटिक AI सबसे बड़े साइबर हमलों का मुख्य कारण बन सकता है। कई विशेषज्ञ इसे डीपफेक टेक्नोलॉजी से भी बड़ा खतरा मान रहे हैं।
AI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है। कंपनियां सुरक्षित माहौल में AI टूल्स का उपयोग कर सकती हैं, लेकिन उन्हें संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना होगा। साथ ही, कंपनियों को सख्त साइबर सिक्योरिटी नियम लागू करने होंगे, ताकि भविष्य में बड़े हमलों को रोका जा सके।
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