शीतल देवी एक अनोखी तीरंदाज हैं, जो कुर्सी पर बैठकर धनुष पर तीर चढ़ाती हैं और 50 मीटर दूर लक्ष्य पर निशाना लगाती हैं। वह अपने दाहिने पैर और कंधे का उपयोग करके स्ट्रिंग खींचती हैं और तीर को अपने जबड़े की ताकत से छोड़ती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उनका शांत आचरण हमेशा अपरिवर्तित रहता है।
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शीतल की रेयर बीमारी: फोकोमेलिया और उसके प्रभाव
जम्मू की 17 वर्षीय शीतल फोकोमेलिया से पीड़ित हैं और बिना बांह वाली प्रतिस्पर्धा करने वाली दुनिया की पहली महिला तीरंदाज हैं। एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद, वह 28 अगस्त से पेरिस पैरालंपिक की तैयारी कर रही हैं।
शीतल ने कहा, “मैं सोना जीतने के लिए पूरी तरह संकल्पित हूँ। मेडल देखकर मैं और अधिक जीतने के लिए प्रेरित होती हूँ। यह बस शुरुआत है।”
इस साल के पैरालंपिक खेलों में लगभग 4000 एथलीट 22 विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे।
तीरंदाजी पैरालंपिक खेलों का हिस्सा 1960 से है। भारत ने 17 संस्करणों में एक कांस्य पदक जीता है।
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शीतल की कोचिंग
चुनौती बड़ी थी, लेकिन शीतल के कोच ने उनके पैरों और ऊपरी शरीर की ताकत का पूरा उपयोग करने में सफलता पाई। शीतल ने कहा कि पेड़ों पर चढ़ने और लिखने जैसी गतिविधियों ने उन्हें ताकत दी, और उन्होंने दर्द के बावजूद तीरंदाजी में करियर बनाने की ठानी।
शीतल अमेरिकी तीरंदाज़ मैट स्टुट्ज़मैन से प्रेरित थीं, जो अपने पैरों से शूटिंग करते हैं। परिवार के पास विशेष उपकरण का खर्च नहीं था, इसलिए उनके कोच ने एक स्थानीय किट बनाई, जिसमें बैग बेल्ट और एक छोटा उपकरण शामिल था।
कोच ने ताकत को संतुलित करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की।
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