आईपीएल 2026 के करीब आते ही ऋषभ पंत ने अपनी फिटनेस पर काम तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी लेना शुरू किया है। पिछले वर्ष जुलाई में भारत-इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखला के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी थी। उस दौरान वह एक पैर के सहारे मैदान से बाहर जाते दिखाई दिए थे। इसके अलावा लॉर्ड्स टेस्ट में विकेटकीपिंग करते समय उनकी उंगली भी चोटिल हुई थी। लगातार लगी चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित कर दिया। इसीलिए ऋषभ ने तेज रिकवरी के लिए विशेष चिकित्सा पद्धति चुनी।
दरअसल हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी एक नियंत्रित चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें मरीज को विशेष बंद चैंबर के अंदर रखा जाता है। इसके बाद डॉक्टर सामान्य वातावरण से अधिक दबाव तैयार करते हैं। फिर मरीज को अधिक मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन दी जाती है। इससे रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। परिणामस्वरूप ऑक्सीजन शरीर के गहरे ऊतकों तक पहुंचती है। इस प्रक्रिया से क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है। साथ ही घाव भरने की गति भी तेज हो जाती है।
इसके अलावा सूजन कम होती है और दर्द नियंत्रित रहता है। इसी कारण खिलाड़ी चोट के बाद यह थेरेपी अपनाते हैं।
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ऋषभ तेज़ रिकवरी के लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन और उच्च दबाव वाले चैंबर में इलाज
‘हाइपरबेरिक’ शब्द दो हिस्सों से बना है। हाइपर का अर्थ सामान्य से अधिक होता है। जबकि बेरिक का अर्थ दबाव होता है। अर्थात यह सामान्य से अधिक दबाव वाला वातावरण दर्शाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार वातावरण में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। साथ ही करीब 21 प्रतिशत ऑक्सीजन मौजूद रहती है। हालांकि इस थेरेपी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जाती है। इसलिए शरीर अधिक ऑक्सीजन अवशोषित कर पाता है। नतीजतन रिकवरी प्रक्रिया तेज हो जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियंत्रित निगरानी में यह सुरक्षित रहती है। अब पंत जल्द मैदान पर वापसी की तैयारी कर रहे हैं।
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