कुछ खिलाड़ी समय के साथ खुद को ढालते हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी समय की दिशा ही बदल देते हैं। वर्तमान दौर में विराट कोहली वनडे क्रिकेट में वही प्रभाव फिर से दिखा रहे हैं। दरअसल, वह एक दशक पहले जैसी बल्लेबाज़ी दोहराते नजर आ रहे हैं। ऐसा महसूस होता है कि 2016 का दौर दोबारा लौट आया है। उस समय भी कोहली सिर्फ रन नहीं बनाते थे। बल्कि वह विरोधी टीमों की रणनीति, धैर्य और आत्मविश्वास भी तोड़ देते थे।
भारत की हार के बावजूद कोहली की निरंतरता और शतक ने मैच की कहानी बदल दी
हाल के प्रदर्शन इस बदलाव की साफ तस्वीर पेश करते हैं। हालिया सात वनडे पारियों में कोहली ने छह बार पचास से अधिक रन बनाए हैं। इसलिए, यह प्रदर्शन किसी अस्थायी लय का परिणाम नहीं लगता। बल्कि यह निरंतरता और आत्मविश्वास की मजबूत वापसी दिखाता है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोहली ने 135 और 102 रनों की अहम पारियां खेलीं। इसके बाद, न्यूजीलैंड के खिलाफ वडोदरा में उन्होंने 93 रन बनाए।
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सीरीज़ गंवाने के बीच कोहली की बल्लेबाज़ी बनी चर्चा का केंद्र
फिर इंदौर में उन्होंने 124 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। इन पारियों ने सिर्फ अच्छे फॉर्म का संकेत नहीं दिया। इसके बजाय, उन्होंने एक बल्लेबाज़ के आत्म-पुनर्जागरण की कहानी कही। जहां रोहित शर्मा शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पा रहे हैं। वहीं, कोहली लगातार पारी को गहराई तक ले जा रहे हैं। नतीजतन, वह टीम को मुश्किल हालात से निकालने की कोशिश करते दिखे। इसके साथ ही, उनका संयम और शॉट चयन फिर से प्रभावी नजर आया।इंदौर में खेले गए मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, भारत ने पूरी वनडे सीरीज़ भी गंवा दी।
न्यूज़ीलैंड की ऐतिहासिक जीत के बावजूद सुर्खियों में रहा कोहली का प्रदर्शन
न्यूजीलैंड ने 37 वर्षों में पहली बार भारत में वनडे सीरीज़ जीती। इस तरह, मेहमान टीम ने भारतीय सरजमीं पर इतिहास रच दिया। हालांकि, इस ऐतिहासिक नतीजे के बावजूद चर्चा की दिशा अलग रही। रविवार की शाम की कहानी स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रही। इसके बजाय, पूरी बहस एक ही खिलाड़ी के इर्द-गिर्द घूमती रही। फिर से, विराट कोहली ही क्रिकेट प्रेमियों की बातचीत का केंद्र बने। हार के बावजूद, उनके शतक ने मैच का भावनात्मक असर बदल दिया। इस कारण, प्रशंसकों ने परिणाम से ज्यादा प्रदर्शन को याद रखा। अंततः, यह शाम जीत और हार से आगे बढ़कर कोहली की विरासत की कहानी बन गई।
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