वडोदरा के ऑटो चालक की बेटी हिमानी हिरानी ने तुर्की में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई है। हिमानी ने अंडर-71 किलोग्राम कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल मुकाबले में रूस की रेसलर को हराया। निर्णायक मुकाबले में उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को पिन करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और वडोदरा में खुशी का माहौल है। हिमानी की सफलता ने उनके संघर्ष और मेहनत को भी सामने रखा है।
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‘दंगल’ से प्रेरणा लेकर कुश्ती में बनाया मुकाम
हिमानी एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता प्रकाशभाई ऑटो रिक्शा चलाते हैं, जबकि उनकी मां मीनाबेन गृहिणी हैं। हिमानी और उनकी बहन मेघा ने आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ देखने के बाद कुश्ती को करियर के रूप में चुनने का फैसला किया। फिल्म में बेटियों के रेसलिंग चैंपियन बनने की कहानी ने दोनों बहनों को प्रेरित किया। इसके बाद उनके माता-पिता ने बेटियों के सपनों का समर्थन किया और दोनों ने वडोदरा के सलातवाड़ा स्थित नारायण गुरु अखाड़े में कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की।
लगातार अभ्यास और अनुशासित ट्रेनिंग के जरिए हिमानी ने अपनी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास को मजबूत किया। तुर्की की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने अंडर-71 किलोग्राम वर्ग में मुकाबले खेले और शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उनका सामना रूस की रेसलर से हुआ। हिमानी ने मुकाबले में बेहतर नियंत्रण दिखाते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी को पिन किया और गोल्ड मेडल जीत लिया। इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन को नई पहचान दी।
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तुर्की में शानदार प्रदर्शन से जीता गोल्ड
तुर्की से लौटने के बाद वडोदरा रेलवे स्टेशन पर हिमानी का जोरदार स्वागत किया गया। परिवार, कोच और साथी रेसलरों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। गले में गोल्ड मेडल पहने हिमानी को देखकर उनके माता-पिता भावुक हो गए। परिवार ने उनकी मेहनत और उपलब्धि पर खुशी जताई। हिमानी की इस जीत ने स्थानीय स्तर पर भी युवा खिलाड़ियों के बीच उत्साह बढ़ाया है।
अब हिमानी की नजर नवंबर 2026 में अमेरिका में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। वह इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हैं। तुर्की में मिली सफलता उनके लिए अगले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली उपलब्धि है। हिमानी आगे भी बेहतर प्रदर्शन करके देश के लिए पदक जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। उनकी कहानी खेल के प्रति समर्पण, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग को दर्शाती है।
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