भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने गुरुवार को रोमांचक मुकाबले में चीन के डिंग लिरेन को हराकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। यह खिताबी जीत भारतीय शतरंज में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। महान विश्वनाथन आनंद के बाद यह खिताब जीतने वाले गुकेश दूसरे भारतीय हैं। आनंद ने अपने करियर में पांच बार यह प्रतिष्ठित खिताब जीता था।
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रोमांचक मुकाबले में गुकेश ने बनाया दबदबा
14 बाजियों के इस मुकाबले में गुकेश ने 7.5 अंकों के साथ विजेता का खिताब हासिल किया, जबकि लिरेन 6.5 अंकों पर रह गए। गुरुवार की आखिरी बाजी अधिकांश समय ड्रॉ की ओर दिख रही थी, लेकिन लिरेन की एक गलती का फायदा उठाकर गुकेश ने मुकाबला अपने नाम किया। इस जीत के लिए गुकेश को 25 लाख डॉलर (करीब 21 करोड़ रुपये) की इनामी राशि में से 13 लाख डॉलर (करीब 11.03 करोड़ रुपये) मिले।
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बचपन के सपने को साकार करने पर बोले गुकेश
चेन्नई के गुकेश ने इस ऐतिहासिक जीत पर कहा, “मैं पिछले 10 वर्षों से इस पल का सपना देख रहा था। मुझे खुशी है कि मैंने इस सपने को हकीकत में बदला।” जीत के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए बाहें उठाकर जश्न मनाया। उनका आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प इस खिताबी जीत की प्रमुख वजह रहे।
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शतरंज की दुनिया में भारत का बढ़ता दबदबा
गुकेश की यह जीत भारतीय शतरंज के लिए बेहद खास है। इससे पहले गैरी कास्पारोव 1985 में 22 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बने थे। गुरुवार की जीत से पहले भी गुकेश ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया था। उनकी इस सफलता ने भारत को शतरंज की वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।

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