बॉक्सिंग-डे टेस्ट 26 दिसंबर से शुरू होने वाला क्रिकेट का एक ऐतिहासिक मुकाबला है, जिसकी परंपरा 19वीं सदी से चली आ रही है। ऑस्ट्रेलिया में यह टेस्ट आमतौर पर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर खेला जाता है। पिछले 15 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया को इसमें केवल दो बार हार का सामना करना पड़ा है और दोनों मौकों पर भारत ने उसे शिकस्त दी है। यही कारण है कि बॉक्सिंग-डे टेस्ट को क्रिकेट इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक अध्यायों में गिना जाता है।
क्रिकेट कैलेंडर में टेस्ट का नाम आते ही उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। हर साल 26 दिसंबर से शुरू होने वाला यह मुकाबला केवल क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि परंपरा, इतिहास और संस्कृति का संगम बन चुका है। खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले बॉक्सिंग-डे टेस्ट को साल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मुकाबलों में शामिल किया जाता है।
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26 दिसंबर से शुरू होने वाला बॉक्सिंग-डे टेस्ट क्यों माना जाता है क्रिकेट की सबसे खास परंपरा
क्रिकेट में इस परंपरा की शुरुआत 1892 में हुई, जब ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में क्रिसमस के आसपास मुकाबले खेले जाने लगे। हालांकि, पहला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय टेस्ट 1950-51 की एशेज सीरीज में खेला गया। यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच हुआ था, जिसमें मैच का एक दिन 26 दिसंबर को पड़ा था।
26 दिसंबर को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ देशों में लोग इसे चर्च में रखे गए क्रिसमस बॉक्स से जोड़ते हैं, जिसमें गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उपहार जमा किए जाते थे। क्रिसमस के अगले दिन इन बॉक्स को खोलकर दान बांटा जाता था।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह दिन उन लोगों को समर्पित है, जो क्रिसमस के बावजूद काम करते हैं। इस अवसर पर उनकी मेहनत और समर्पण को सम्मान दिया जाता है। क्रिकेटर्स भी त्योहार के दौरान अपने परिवार से दूर रहकर मैदान पर उतरते हैं, इसलिए इस दिन का खेल से गहरा जुड़ाव माना जाता है।
वेस्टर्न क्रिश्चियनिटी के कैलेंडर के अनुसार, क्रिसमस के अगले दिन लोग एक-दूसरे को उपहार स्वरूप क्रिसमस बॉक्स देते हैं। कई देशों में इस दिन को सेंट स्टीफंस डे भी कहा जाता है। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक, यह क्रिसमस की छुट्टी के बाद हफ्ते का पहला कार्यदिवस होता है, जब नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उपहार देते हैं।
क्रिकेट में इस दिन से जुड़े मुकाबलों को व्यापक पहचान 1892 में मिली, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के तहत विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच क्रिसमस के दौरान मैच खेला गया। इसके बाद यह परंपरा हर साल दोहराई जाने लगी।
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