पश्चिम बंगाल चुनावी नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर केंद्रित कर दिया है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर जारी है और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 8 मई के आसपास योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। पार्टी इस बदलाव को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देख रही है।
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योगी मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित तारीख तय
भाजपा इस संभावित मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है, जिसमें दलित, ओबीसी और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद पार्टी नेतृत्व अब उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुट गया है। इस दौरान समाजवादी पार्टी से आए कुछ नेताओं और भाजपा के पुराने अनुभवी चेहरों को भी जगह मिलने की संभावना है। मंत्रिमंडल विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज और अवध क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पश्चिम यूपी में दलित और जाट-गुर्जर समीकरण को साधने की रणनीति बनाई जा रही है, जबकि ब्रज और अवध क्षेत्र से ब्राह्मण नेताओं को शामिल किए जाने की चर्चा तेज है।
श्रीकांत शर्मा, पूजा पाल और सपा से आए मनोज पांडे जैसे नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। करीब एक दर्जन नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की योजना है ताकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। इस बीच पार्टी के सामने यूजीसी बिल और बिजली मीटर जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा इन मुद्दों पर जनता का भरोसा वापस जीतने की कोशिश करेगी। पिछले कई हफ्तों से भाजपा महासचिव विनोद तावड़े लगातार फीडबैक ले रहे हैं और दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ मंथन जारी है। चुनावी साल में यह विस्तार पार्टी की रणनीति के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
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