September 18, 2026

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शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज सहित 30 प्रस्तावों को योगी कैबिनेट की मंज़ूरी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा जगत को एक बड़ी राहत देते हुए शिक्षकों और शिक्षामित्रों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने कैशलेस मेडिकल बीमा योजना को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अब पात्र लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा।

दरअसल, लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब दो घंटे चली कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 30 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। इसके साथ ही राज्य विधानसभा के बजट सत्र को बुलाने पर भी मुहर लगाई गई। बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू होगा, जबकि 11 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा।

शिक्षा जगत को बड़ा लाभ

इस फैसले के तहत माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के अलावा रसोइयों और अन्य कार्मिकों को भी कैशलेस मेडिकल बीमा की सुविधा दी जाएगी। इतना ही नहीं, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों और स्ववित्तपोषित स्कूलों के शिक्षक भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।

इसके अलावा, बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के शिक्षक, शिक्षा मित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी विद्यालय का स्टाफ और पीएम पोषण योजना के रसोइये अपने परिवार के साथ कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इस निर्णय से बेसिक शिक्षा विभाग के लगभग 11.95 लाख शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 2.97 लाख कर्मियों को भी पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलेगा।

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विकास परियोजनाओं और अन्य अहम फैसलों को हरी झंडी

इसी क्रम में सरकार ने जिलों के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। बरेली और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को अपने-अपने जिलों में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, गोरखपुर में ₹721 करोड़ और वाराणसी के 18 वार्डों में ₹266 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट्स को वित्तीय स्वीकृति दी गई।

इसके अलावा, लखनऊ–हरदोई सीमा पर प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के लिए ₹458 करोड़ से अधिक की जलापूर्ति योजना को भी पास कर दिया गया है।

मानवीय दृष्टिकोण से एक अहम निर्णय लेते हुए, पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि और सुविधाओं की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है। साथ ही, उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा और सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) की नियमावली में संशोधन के प्रस्तावों को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है।

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