Water Strike की आशंका के बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव अब केवल तेल की राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे यह पानी के संकट की आशंका को भी जन्म दे रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल संसाधनों को निशाना बनाया गया, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र गंभीर संकट में फंस सकता है। इस पूरे परिदृश्य में Water Strike शब्द तेजी से चर्चा में आया है, क्योंकि कई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पानी के संयंत्रों पर हमला किसी भी देश के लिए परमाणु हमले जितना विनाशकारी साबित हो सकता है।
दरअसल, खाड़ी के अधिकांश देश प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोतों से लगभग वंचित हैं। वे अपनी आबादी की पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए समुद्री खारे पानी को शुद्ध करने वाली तकनीक पर निर्भर हैं। इसी वजह से इन देशों के लिए वाटर डिसेलिनेशन प्लांट जीवनरेखा की तरह काम करते हैं। यदि इन संयंत्रों पर हमला होता है, तो कुछ ही घंटों में लाखों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो सकता है। हाल ही में ईरान के एक जल संयंत्र पर कथित हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है।
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Water Strike का खतरा और खाड़ी देशों की निर्भरता
मध्य पूर्व के रेगिस्तानी देशों में जीवन का आधार केवल तेल नहीं बल्कि समुद्री पानी से तैयार किया गया पीने योग्य जल है। डिसेलिनेशन तकनीक के माध्यम से खारे पानी को साफ करके पीने के लिए उपयोग किया जाता है। दुनिया की कुल डिसेलिनेशन क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों में मौजूद है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में ऐसे 400 से अधिक प्लांट काम कर रहे हैं, जिन पर अब संभावित हमलों का खतरा मंडरा रहा है।
हाल की घटनाओं में ईरान के केशम द्वीप के पास स्थित एक जल संयंत्र को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया, जिसके बाद बहरीन में भी इसी तरह के संयंत्र पर ड्रोन हमला हुआ। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। अगर ऐसे हमले सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान या कुवैत जैसे देशों के संयंत्रों पर हुए, तो करोड़ों लोगों को तुरंत पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
हमले के संभावित परिणाम और सुरक्षा उपाय
जल संयंत्रों पर हमले का प्रभाव केवल पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली आपूर्ति और शहरी जीवन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। कई आधुनिक डिसेलिनेशन प्लांट पानी के साथ-साथ बिजली उत्पादन भी करते हैं। इसलिए यदि ये संयंत्र बंद हो जाते हैं, तो बड़े शहरों में बिजली संकट भी पैदा हो सकता है। दुबई, रियाद और अबू धाबी जैसे महानगरों में बिना पानी के जीवन लगभग असंभव हो जाएगा।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन, मिसाइल हमले या समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें इन संयंत्रों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। साइबर हमलों के जरिए भी SCADA सिस्टम को हैक कर संयंत्रों को बंद किया जा सकता है। इसी खतरे को देखते हुए कई खाड़ी देशों ने मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं और बड़े भूमिगत जल भंडार बनाने की योजना पर काम शुरू किया है। इसके साथ ही अब बड़े संयंत्रों की बजाय छोटे-छोटे प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि किसी एक स्थान पर हमला होने से पूरे क्षेत्र की जल आपूर्ति बाधित न हो। हालांकि, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर संघर्ष और बढ़ा, तो पानी भी इस भू-राजनीतिक लड़ाई का नया हथियार बन सकता है।
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