प्राचीन मदुरै शहर को तमिल विरासत की राजधानी और राजनीति का केंद्र माना जाता है। यह शहर पहले एआईएडीएमके का गढ़ था लेकिन अब डीएमके के कब्जे में है। विजय ने अपनी पार्टी के दूसरे राज्य सम्मेलन के लिए मदुरै को चुना और आत्मविश्वास जताया। इस निर्णय को दक्षिणी तमिलनाडु में राजनीतिक संदेश और डीएमके विरोधी वोटों को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
राजनीति में विजय की एंट्री
अभिनेता से नेता बने विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय कदम बढ़ा दिए हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम अगले साल विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरने जा रही है। चेन्नई की एक रैली में विजय ने घोषणा की कि वे मदुरै पूर्व सीट से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जनता से अपील की कि वे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में टीवीके को ही वोट दें।
मदुरै में हजारों समर्थकों के बीच विजय ने किसी भी राजनीतिक गठबंधन से साफ इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवीके अकेले चुनाव लड़ेगी और किसी दल के अधीनस्थ नहीं बनेगी। विजय ने कहा कि वे खुद को शेर मानते हैं और तमिल राजनीति में अपना क्षेत्र चिन्हित कर रहे हैं। इस बयान से भाजपा और एआईएडीएमके के साथ संभावित गठबंधन की संभावना खत्म हो गई।
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भाजपा और डीएमके को चुनौती
विजय ने कहा कि उनका वैचारिक दुश्मन भाजपा है और राजनीतिक प्रतिद्वंदी डीएमके है। उन्होंने दोहराया कि 2026 का चुनाव केवल डीएमके और टीवीके के बीच लड़ा जाएगा। विजय ने जोर देकर कहा कि कोई गठबंधन नहीं होगा और पार्टी पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी।
विजय ने कहा कि टीवीके की राजनीति वास्तविक, भावनात्मक और लोगों की भलाई के लिए समर्पित है। उनकी प्राथमिकता महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि टीवीके किसानों, युवाओं, ट्रांसजेंडर, उपेक्षित बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों का विशेष ध्यान रखेगी। टीवीके एक ऐसी शक्ति बनेगी जो जनता की समस्याओं को हल करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।
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