पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में चल रही अंदरूनी खींचतान को खत्म करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इसी कड़ी में उन्होंने दिनारा से विधायक आलोक सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब पार्टी में असंतोष और टूट की अटकलें तेज थीं।
दरअसल, कुर्मी और कोइरी (लव-कुश) राजनीति की पहचान रखने वाले कुशवाहा ने इस बार राजपूत समाज से आने वाले विधायक को बिहार में संगठन की कमान सौंपी है। गौरतलब है कि आलोक सिंह पहले पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। वहीं, संगठन को संतुलित रखने के लिए कुशवाहा ने दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं। इसके साथ ही अब तक प्रदेश अध्यक्ष रहे मदन चौधरी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया है। इस पूरे संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई।
NDA सरकार के बाद बढ़ी थी रालोमो में खटपट
असल में, नवंबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में नई एनडीए सरकार बनने के बाद से रालोमो के भीतर असंतोष पनपने लगा था। खासतौर पर उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने से कई पदाधिकारी नाराज हो गए थे और उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया था। इसके बाद हालात इतने बिगड़े कि कुशवाहा को पार्टी की प्रदेश और जिला इकाइयों को भंग करना पड़ा।
इसी बीच पार्टी के चार में से तीन विधायक—माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो—की नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आईं। हालात तब और गंभीर हो गए, जब इन विधायकों की भाजपा से नजदीकियों की खबरें सामने आने लगीं।
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भाजपा से मुलाकात और विधायकों को मनाने की कोशिश
हाल ही में तीनों विधायकों द्वारा पार्टी अध्यक्ष की ‘लिट्टी पार्टी’ से दूरी बनाए रखने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन से उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। इससे रालोमो में संभावित टूट की आशंका और गहरा गई थी। हालांकि, 16 जनवरी को उपेंद्र कुशवाहा ने माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने आवास पर बुलाकर बातचीत की और नाराजगी दूर करने का प्रयास किया। हालांकि, इस बैठक में तीसरे विधायक रामेश्वर महतो शामिल नहीं हुए।
इन परिस्थितियों के बीच पार्टी को टूट से बचाने के लिए कुशवाहा ने संगठनात्मक बदलाव का रास्ता चुना। पहले मधुबनी विधायक माधव आनंद को विधानसभा में रालोमो का सचेतक बनाया गया और अब आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुशवाहा का जातीय संतुलन साधने का प्रयास
गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीति अब तक कुर्मी और कोइरी जातियों यानी लव-कुश समीकरण पर केंद्रित रही है। यही समीकरण बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावी माना जाता है और जदयू की राजनीति भी इसी आधार पर टिकी रही है। ऐसे में राजपूत समाज से आने वाले आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कुशवाहा ने सामाजिक संतुलन साधने और पार्टी का दायरा बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
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