संसद के बजट सत्र के बीच यूपी विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया है, जो 20 फरवरी तक चलेगा। लगभग दस दिनों तक चलने वाले इस अहम सत्र में योगी सरकार 11 फरवरी को अपना बजट पेश करेगी। हालांकि, बजट से पहले ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है, ऐसे में सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव, तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के संयुक्त सदन में अभिभाषण से होगी। इस अभिभाषण के जरिए सरकार बीते एक साल में किए गए कामकाज, नीतिगत फैसलों और जनकल्याणकारी योजनाओं को विस्तार से सदन के सामने रखेगी। इसके बाद हाल ही में कैबिनेट से पारित अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखा जाएगा। वहीं, बुधवार को पेश होने वाले बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह बजट आगामी चुनावों से पहले सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाने वाला माना जा रहा है।
बजट से पहले कैबिनेट बैठक, चुनावी रणनीति की झलक
इसके अलावा, बजट पेश किए जाने से पहले बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक अहम और निर्णायक बैठक होने जा रही है। इस बैठक में बजट के मसौदे पर गहन चर्चा की जाएगी और विभिन्न विभागों से जुड़े खर्च, नई योजनाओं, चल रही परियोजनाओं और प्रस्तावित कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभागों के बजट आवंटन पर विशेष मंथन हो सकता है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के जरिए यह तय होगा कि किन क्षेत्रों को बजट में ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी, किन योजनाओं को विस्तार मिलेगा और किन नई पहलों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जाएंगे।
दूसरी ओर, आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बजट को राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि योगी सरकार इस बजट के जरिए विभिन्न वर्गों को साधने की कोशिश करेगी और महिलाओं, किसानों, युवाओं व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई नए ऐलान कर सकती है। इसके साथ ही, रोजगार सृजन, किसान कल्याण, महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर खास फोकस रहने की संभावना है। सरकार पहले किए गए अधूरे वादों को पूरा करने और मौजूदा योजनाओं के दायरे को बढ़ाने का भी प्रयास कर सकती है, ताकि चुनावी माहौल में जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाए और सरकार अपनी उपलब्धियों को मजबूती से सामने रख सके।
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विपक्ष ने सरकार को घेरने की बनाई रणनीति
वहीं, बजट सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दे दिए हैं। समाजवादी पार्टी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। सपा विधायक सत्र शुरू होने से पहले सुबह 10 बजे चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे।
इसके साथ ही, सदन के भीतर भी विपक्ष कई संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कोडीन कफ सिरप की तस्करी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है और हंगामा भी कर सकता है। हालांकि, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सर्वदलीय बैठक में सदन को सुचारु रूप से चलाने का भरोसा जरूर दिया गया है, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा SIR को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सियासी माहौल और ज्यादा गर्म होता नजर आ रहा है।
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