अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए 20-बिंदुओं का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने हमास को चेतावनी दी कि उनके पास केवल तीन से चार दिन हैं, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई देशों ने ट्रंप की इस पहल का स्वागत किया और इसे गाजा संघर्ष समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना। हमास इस प्रस्ताव पर अब भी विचार कर रहा है और उसने किसी सार्वजनिक बयान से परहेज़ किया है। ट्रंप की योजना के अनुसार, अगर दोनों पक्ष इसे स्वीकार करते हैं तो युद्ध के 72 घंटे के भीतर सभी जीवित और मृत बंधकों को रिहा करना अनिवार्य होगा। यह प्रस्ताव गाजा में शांति बहाल करने, मानवता बचाने और युद्ध के बाद प्रशासन स्थापित करने के प्रयासों का हिस्सा है।
ट्रंप ने गाजा के लिए 20-बिंदुओं की योजना का विवरण दिया
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में ट्रंप ने इस 20-बिंदुओं की योजना को कई अरब देशों के साथ साझा किया और इसे लागू करने की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना तुरंत युद्ध समाप्त करने और युद्ध के बाद गाजा में प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। प्रस्ताव के तहत एक अस्थायी प्रशासनिक बोर्ड बनाए जाने का प्रावधान है, जिसके अध्यक्ष ट्रंप होंगे और इसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे। योजना में गाजा के निवासियों को उनके घर छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी और अगर दोनों पक्ष योजना को स्वीकार करते हैं, तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर हमास प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका पूरी तरह से इस्राइल का समर्थन करेगा और हमास को निहत्था करने की रणनीति अपनाएगा।
गाजा लगभग 365 वर्ग किलोमीटर का छोटा सा क्षेत्र है, जिसके उत्तर-पूर्व और पूर्व में इस्राइल, दक्षिण-पश्चिम में मिस्र और पश्चिम में भूमध्य सागर है। गाजा क्षेत्र इस्राइल और हमास के संघर्ष का केंद्र रहा है। हमास ने पिछले दो दशकों से गाजा पर नियंत्रण रखा है और वह इस्राइल की वैधता को स्वीकार नहीं करता। हमास, जिसे हरकत अल-मुकावमा अल-इस्लामिया भी कहा जाता है, अपनी सशस्त्र शाखा इज़ अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड के माध्यम से इस्राइल पर हमले करता है और आतंकवादी कार्रवाईयों में संलग्न रहता है। हमास ने अक्टूबर 2023 में दक्षिणी इस्राइल पर हमला किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हो गया। ट्रंप की योजना हमास से हथियार छोड़ने, शांति स्थापित करने और प्रशासनिक बोर्ड के सहयोग में शामिल होने की मांग करती है, लेकिन योजना में कई महत्वपूर्ण विवरण अस्पष्ट हैं।
पूर्व शांति प्रयास और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ
इस्राइल और हमास के बीच पहले भी कई बार युद्धविराम के प्रयास हुए हैं, लेकिन वे कभी स्थायी नहीं रहे। मार्च 2024 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा में तुरंत युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता का प्रस्ताव पारित किया, लेकिन इसे लागू करने के ठोस उपाय नहीं बताए गए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय पांडे के अनुसार, ट्रंप की योजना में अभी भी कई अनुत्तरित प्रश्न हैं। इसमें हमास की शासन में भूमिका, इस्राइल की द्वि-राष्ट्र नीति और गाजा के पुनर्निर्माण की स्पष्ट रूपरेखा शामिल नहीं है। साथ ही यह स्पष्ट नहीं है कि हमास कब और किस शर्त पर अपने हथियार छोड़ने के लिए तैयार होगा और योजना को स्वीकार करने में क्या बाधाएं होंगी।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की 20-बिंदुओं की योजना पर हमास से सहमति प्राप्त करना बेहद कठिन प्रतीत होता है। इसके बावजूद, यह योजना ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय छवि को एक संवेदनशील और सक्रिय शांति प्रदाता के रूप में स्थापित करती है। अगर हमास प्रस्ताव को अस्वीकार करता है, तो यह इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को यह दिखाने का अवसर देगा कि उन्होंने शांति के प्रयास किए, लेकिन हमास ने जवाब नहीं दिया। इसके साथ ही, अमेरिका को इस्राइल का बिना किसी रोक-टोक समर्थन देने का अवसर भी मिलेगा। जब तक हमास प्रतिक्रिया नहीं देता, गाजा संघर्ष मानवीय, राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से उच्च तनाव वाला बना रहेगा। ट्रंप की पहल हालांकि विवादित है, लेकिन यह क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका को स्पष्ट रूप से दिखाती है।
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