कांग्रेस नेता ने गुजरात हाईकोर्ट के 17 जनवरी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने यह तर्क दिया था कि मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है. अब सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज ‘भड़काऊ’ गाने के मामले में एफआईआर को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक अनिवार्य तत्व है, और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना अदालत का दायित्व है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान और उसके मूल्यों की रक्षा करना उसका कर्तव्य है.
Also Read : मोदी की थाईलैंड-श्रीलंका यात्रा, BIMSTEC में शामिल होंगे
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसका महत्व
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि भले ही बड़ी संख्या में लोग किसी दूसरे के विचारों को पसंद न करते हों, लेकिन विचारों को व्यक्त करने के व्यक्ति के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और उसकी रक्षा की जानी चाहिए। सेहतमंद समाज में बोलने की आजादी का सम्मान होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विचारों और दृष्टिकोणों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गरिमापूर्ण जीवन जीना असंभव है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का विरोध दूसरे दृष्टिकोण को व्यक्त करके किया जाना चाहिए. भले ही बड़ी संख्या में लोग दूसरे द्वारा व्यक्त किए गए विचारों को नापसंद करते हों, लेकिन व्यक्ति के विचार व्यक्त करने के अधिकार का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए.
Also Read : बेंगलुरु: पत्नी की हत्या कर शव सूटकेस में डालकर पति पुणे फरार
इमरान प्रतापगढ़ी पर भड़काऊ गीत गाने का मामला
इससे पहले 3 जनवरी को प्रतापगढ़ी पर जामनगर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह के दौरान कथित भड़काऊ गीत गाने के लिए मामला दर्ज किया गया था. कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतापगढ़ी पर अन्य धाराओं के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, जाति आदि के आधार पर नफरत को बढ़ावा देना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए खतरनाक दावे) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इमरान प्रतापगढ़ी की ओर से ‘एक्स’ पर अपलोड की गई 46 सेकंड की वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि जब वह हाथ हिलाते हुए चल रहे थे, तो उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जा रही थीं और एक गाना बज रहा था. इसे लेकर एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि इसके बोल भड़काऊ, राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले थे.
Also Read : शाहजहांपुर हत्याकांड: रोती मां – “पति ने मार डाला, मैंने चप्पल तक नहीं पहनी”


More Stories
Mumbai Police Discovers Rs 6.5 Crore Payroll Fraud Involving 10 Ghost Employees After System Change
HBO Has No New Show Replacing ‘House of the Dragon’ Season 3 Next Week
E20 पॉलिसी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल का PM आवास तक मार्च, दिल्ली पुलिस ने रास्ते में रोका