मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए राहुल गांधी आज सूरत पहुंचे। सत्र अदालत ने उन्हें 13 अप्रैल तक के लिए जमानत दे दी और मामले में अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। इस दौरान राहुल गांधी के साथ उनकी बहन प्रियंका वाड्रा और तीन राज्यों के प्रमुख भी मौजूद रहे।
इससे पहले सूरत के चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने राहुल गांधी को 23 मार्च के दिन ‘मोदी सरनेम’ मामले में 2 साल की सज़ा का ऐलान किया था। साथ ही कुछ देर बाद अदालत की तरफ से उन्हें जमानत भी दे दी गई थी और उनकी सजा पर 30 दिनों तक के लिए रोक लगा दी थी, ताकि वो इस मामले को ऊपरी अदालत में ले जा सकें। हालांकि इस सज़ा के बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता को भी खत्म कर दिया गया था।
राहुल गांधी को एक अदालत ने 23 अप्रैल को सजा सुनाई थी, लेकिन अगले दिन लोकसभा सचिवालय ने संसद में उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी। इसका मतलब है कि राहुल गांधी अगले 8 साल तक ऑफिस नहीं चला पाएंगे। यदि वह एक उच्च न्यायालय द्वारा बरी हो जाता है, तो उसकी सदस्यता वापस कर दी जाएगी और वह कार्यालय चलाने में सक्षम हो जाएगा।
क्या कहा था राहुल गांधी ने?
मामला साल 2019 का है जब राहुल गांधी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भगोड़े कारोबारियों के साथ जोड़ा था। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उपनाम को दो भगोड़े कारोबारियों ललित मोदी, नीरव मोदे के साथ जोड़ा था। उन्होंने कहा था कि ‘चोरों’ का उपनाम यही कैसे होता है।


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