नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेताओं को संसद में शीतकालीन सत्र से पहले सलाह दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी बातें जनता तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँचा पा रहा है। मोदी ने विपक्ष से आग्रह किया कि हार की निराशा को छोड़कर रणनीति में सुधार करें। उन्होंने कहा, जो कोई भी ड्रामा करना चाहता है, वह कर सकता है, लेकिन कार्य पर ध्यान देना चाहिए। मोदी ने स्पष्ट किया कि संसद में नारे नहीं, बल्कि नीति और डिलीवरी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सत्र देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है और इसे विरोध का मंच नहीं बनाना चाहिए। पीएम ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और विकास की गति दोनों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष को नए मुद्दों को उठाने और जिम्मेदारी निभाने की सलाह दी।
Also Read : दिल्ली ब्लास्ट मामला: साबरमती जेल में हिंसा डॉ. अहमद सईद सहित कई घायल
संसद में विपक्ष की भूमिका और कार्य प्राथमिकता
पीएम मोदी ने कहा कि शीतकालीन सत्र देश को विकास की दिशा में ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने लोकतंत्र को समय-समय पर मजबूत और प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है। बिहार चुनाव में उच्च मतदान प्रतिशत लोकतंत्र की शक्ति का परिचायक रहा। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और अर्थतंत्र की मजबूती दुनिया बारीकी से देख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र सक्षम होकर परिणाम दे सकता है और भारत ने यह साबित किया है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि पराजय की निराशा को सदन में नहीं लाएँ। उन्होंने कहा कि विजय का अहंकार भी नहीं बनाना चाहिए। संसद में जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी दलों को युवा सांसदों को अनुभव साझा करने का अवसर देना चाहिए।
मोदी ने कहा कि पहली बार चुने गए सांसद या युवा सदस्य अक्सर परेशान और दुखी महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में नहीं रख पा रहे हैं। मोदी ने विपक्ष से अनुरोध किया कि नई पीढ़ी के सांसदों को पर्याप्त अवसर दिए जाएँ। उन्होंने बताया कि इससे सदन को नए दृष्टिकोण और अनुभव से लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधार ने देशवासियों के मन में विश्वास और श्रद्धा पैदा की है। उन्होंने कहा कि इस सत्र में भी कई नीति सुधार और सुधारात्मक कदम होंगे। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि जनता के बीच जाकर अपनी बात प्रभावी ढंग से रखें। मोदी ने कहा कि गुस्सा सदन में व्यक्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष को अपनी रणनीति बदलने की सलाह दी।
पीएम मोदी: विपक्ष के लिए सलाह और संसद सुधार के निर्देश
उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी रणनीति बदलकर जनता से संवाद बढ़ाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं सुझाव देने के लिए तैयार हूँ, लेकिन सुधार विपक्ष पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दों को नीति आधारित रखना चाहिए, न कि केवल विरोध पर आधारित। मोदी ने कहा कि संसद में कार्य और नीति पर ध्यान देना ही देश के हित में है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि वे जनता तक अपनी बात पहुँचाएँ और नए विचार प्रस्तुत करें। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सत्र का उद्देश्य देश की प्रगति को गति देना है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को लोकतंत्र की मजबूती और विकास को प्राथमिकता देना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से विनम्र आग्रह किया कि रणनीति सुधार के लिए सोच विचार करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सदन में अधिक अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि संसद में कार्य और नीति पर ध्यान देने से लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि नारेबाज़ी और व्यक्तिगत आरोपों से बचें और चर्चा को रचनात्मक बनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और विकास की गति जनता के हित में संतुलित रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी दलों को जिम्मेदारी और नीति आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मोदी ने अंत में कहा कि शीतकालीन सत्र में देश की प्रगति को प्राथमिकता देना सर्वोपरि है।
Also Read : दिल्ली ब्लास्ट मामला: साबरमती जेल में हिंसा डॉ. अहमद सईद सहित कई घायल


More Stories
आशीष कुमार डैश होंगे इन्फोसिस के नए CEO और MD, 1 अप्रैल 2027 से संभालेंगे जिम्मेदारी
Gujarat on Red Alert as Ahmedabad Receives 177 mm Rainfall in Just Two Hours
Rupee slips 4 paise to settle at 96.57 against U.S. dollar