लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बजट सत्र की घटनाओं पर सांसद में अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि विपक्ष के कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंच सकते हैं। इससे कोई अप्रत्याशित स्थिति बन सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का अनुरोध किया। स्पीकर ने साफ किया कि यह फैसला संसद की गरिमा बचाने के लिए लिया गया था। ओम बिरला ने कहा कि सदन में जो व्यवहार देखने को मिला, वह पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष के कार्यालय में किया गया आचरण संसदीय परंपराओं के खिलाफ था। स्पीकर ने दो टूक कहा कि राजनीतिक मतभेद मर्यादा से ऊपर नहीं हो सकते। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रखने में सहयोग मांगा।
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लोकसभा स्पीकर: विपक्ष का आरोप और सांसद में कार्यवाही पर असर
प्रधानमंत्री के सदन में न आने पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा से बच रही है। विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के भाषण के पारित हुआ। हालात को देखते हुए सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई। सत्ता पक्ष का मानना है कि विपक्ष का उद्देश्य कार्यवाही बाधित करना था। इसी कारण सरकार ने समय रहते रणनीति बदली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया गया। सरकार का तर्क है कि इससे संवैधानिक प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता था।
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