मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया है, जिसमें रामनिवास रावत ने मंत्री पद की शपथ ली है। रामनिवास रावत ने कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए थे। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि रामनिवास रावत ओबीसी समुदाय के एक महत्वपूर्ण नेता हैं। मध्य प्रदेश से आज सुबह एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट का विस्तार किया गया। रामनिवास रावत, जो श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा से विधायक हैं, ने इस अवसर पर मंत्री पद की शपथ ली। उन्हें ओबीसी समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है, और उनके बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा है।
रामनिवास रावत के बीजेपी में शामिल होने और मंत्री बनने की खबर ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, और यह कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती साबित हो सकती है। उनके इस कदम से प्रदेश की राजनीति में नई दिशा मिल सकती है और आगामी चुनावों में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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रामनिवास रावत कौन हैं?
रामनिवास रावत विजयपुर सीट से 6 बार के विधायक रहे हैं और पहले भी दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे हैं। वह पूर्व केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के सामने कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
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क्या है कांग्रेस से नाराजगी की वजह?
रामनिवास रावत की गिनती सीनियर नेताओ में होती है। वह इसलिए कांग्रेस से नाराज हुए क्योंकि आलाकमान द्वारा लगातार उनकी अनदेखी की जा रही थी। उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बनाया गया, ये भी उनकी नाराजगी की एक अहम वजह रही। इसके अलावा जब प्रदेश में कमलनाथ सरकार थी, तब भी उन्हें कोई पद नहीं दिया गया था।
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कब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए?
30 अप्रैल को, एक जनसभा में रामनिवास रावत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और डॉ. नरोत्तम मिश्रा की उपस्थिति में बीजेपी की सदस्यता ली। यह खबर कांग्रेस के लिए काफी चौंकाने वाली थी। रविवार को, रामनिवास रावत ने 7 दिनों तक चलने वाली भागवत कथा के लिए कलश यात्रा का आयोजन किया। इसके बाद, वह सीएम हाउस के बुलावे पर भोपाल रवाना हो गए।
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