लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना बहस पारित किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में पारंपरिक जवाब नहीं दिया। सत्तापक्ष ने इसके लिए विपक्ष के हंगामे को जिम्मेदार ठहराया। कार्यवाही कई बार बाधित होने के बाद ध्वनिमत से पूरी हुई। यह संसदीय परंपरा से अलग घटना मानी जा रही है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संभावित अप्रत्याशित घटनाओं की विश्वसनीय जानकारी मिलने का दावा किया। अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी। बीजेपी नेताओं ने अध्यक्ष के फैसले का समर्थन किया। सरकार ने विपक्ष के आचरण को असंसदीय बताया।
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हंगामे के बीच लोकसभा में बिना बहस धन्यवाद प्रस्ताव पारित
कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।प्रियंका गांधी ने कहा प्रधानमंत्री ने सदन में आने का साहस नहीं दिखाया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर सच से डरने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों ने बिना बहस प्रस्ताव पारित होना असामान्य बताया। विशेषज्ञों ने कहा यह संसदीय इतिहास में दुर्लभ घटना है। उन्होंने सरकार पर सहानुभूति बटोरने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। पीएम ने राज्यसभा में जवाब देकर परंपरा निभाई। लोकसभा में जवाब न देना सवालों के घेरे में है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने सरकार और विपक्ष के रिश्तों में बढ़ती कटुता बताई। उन्होंने कहा पहले संवाद से संसद चलाई जाती थी। अब टकराव ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया है। विपक्ष लगातार बोलने का अधिकार मांग रहा है। संसद में गतिरोध खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे।
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