अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद दिखने लगे हैं। ट्रंप ने साउथ पार्स हमले पर सख़्त और अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा, अमेरिका को इस खास हमले की जानकारी नहीं थी। इसराइली मीडिया ने पहले से अमेरिकी सहमति की खबरें छापीं। इन विरोधी दावों ने दोनों सहयोगियों के रिश्तों पर सवाल उठाए।
ट्रंप ने हमले को गुस्से में किया गया कदम बताया। उन्होंने इज़राइल को आगे ऐसे हमलों से बचने को कहा। उनकी भाषा सहयोगी समर्थन से ज्यादा नाराज़गी दिखाती है। इससे संकेत मिला कि वॉशिंगटन हर कदम से सहमत नहीं। तेल कीमतें बढ़ीं, इसलिए ट्रंप की बेचैनी और बढ़ी।
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ईरान मुद्दे पर अमेरिका-इज़राइल के सुर अलग दिखे
नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ पूरा तालमेल होने का दावा किया। उन्होंने कहा, इज़राइल ने गैस फ़ील्ड पर अकेले कार्रवाई की। इसराइली अधिकारियों ने हमले को रणनीतिक दबाव का हिस्सा बताया। वे ईरानी शासन को भीतर से कमजोर करना चाहते हैं। यह लक्ष्य अमेरिका की प्राथमिकताओं से कुछ अलग दिखता है।
अमेरिका ने मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमता पर ध्यान दिया। इज़राइल ने नेतृत्व और शासन ढांचे को निशाना बनाया। यहीं दोनों देशों की रणनीतियों में असली फर्क उभरता है। ट्रंप जीत घोषित करने का रास्ता जल्दी खोजना चाहते हैं। नेतन्याहू लंबे दबाव और बड़े बदलाव की तरफ झुकते दिखते हैं।
क़तर पर हमले के बाद ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी। उन्होंने कहा, दोबारा हमला हुआ तो जवाब बहुत बड़ा होगा। फिर भी उन्होंने क़तर की भूमिका से इनकार किया। युद्ध बढ़ने से अमेरिका में राजनीतिक जोखिम भी बढ़ रहा है। यही वजह है, दोनों देशों के मतभेद अब ज्यादा दिख रहे हैं।
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