अमेरिका ने भारत-रूस संबंधों को निशाना बनाते हुए भारत पर रूस से तेल खरीदने का आरोप लगाया और कहा कि यह खरीदारी अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रही है। इसी आधार पर अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया, जिससे व्यापारिक तनाव बढ़ गया। अमेरिका ने न केवल यह कदम उठाया, बल्कि जी7 देशों पर भी दबाव बनाया कि वे भारत के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर रूस के साथ उसकी ऊर्जा साझेदारी पर रोक लगाएं। भारत ने अमेरिकी आरोपों को बेबुनियाद, अतार्किक और पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। भारतीय अधिकारियों ने साफ कहा कि ऊर्जा आयात केवल राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता है और किसी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ युद्ध का असर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर लंबे समय तक देखा जा सकता है।
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भारत-रूस संबंधों पर मॉस्को का बयान
रूस ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी और भारत-रूस संबंधों को लेकर स्पष्ट बयान जारी किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और रूस की दोस्ती दशकों से समय की कसौटी पर खरी उतरी है और लगातार मजबूत हो रही है। मंत्रालय ने साफ किया कि यह साझेदारी संप्रभुता, रणनीतिक स्वायत्तता और परस्पर सम्मान की नींव पर आधारित है। मॉस्को ने यह चेतावनी भी दी कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव से रिश्तों को तोड़ने की हर कोशिश नाकाम होगी। उसने कहा कि भारत-रूस संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राजनीतिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी गहरे जुड़े हुए हैं। रूस ने यह भी दोहराया कि इन संबंधों को कोई बाहरी ताकत प्रभावित नहीं कर सकती।
रूसी विदेश मंत्रालय ने मीडिया से बातचीत में भारत के अडिग रुख की खुलकर प्रशंसा की। उसने कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के लगातार टैरिफ दबाव के बावजूद भारत ने स्वतंत्र नीति अपनाई है और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मंत्रालय ने बताया कि भारत का यह रुख भारत-रूस की पुरानी दोस्ती और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। मॉस्को ने कहा कि भारत का यह कदम न केवल दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत बनाता है, बल्कि वैश्विक राजनीति में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। उसने यह भी कहा कि भारत-रूस की दोस्ती अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग और भरोसे का प्रतीक है।
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भारत-रूस की बढ़ती साझेदारी
रूस ने जोर देकर कहा कि भारत-रूस संबंध केवल तेल और व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश नागरिक और सैन्य उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों और तकनीकी विकास में भी साथ काम कर रहे हैं। दोनों देश राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं और नई भुगतान प्रणालियों के विकास पर मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, वे वैकल्पिक परिवहन मार्गों और रसद नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए भी ठोस कदम उठा रहे हैं। मॉस्को ने कहा कि इन परियोजनाओं ने भारत-रूस की साझेदारी को और विश्वसनीय तथा रणनीतिक बना दिया है। उसने इस बात पर भी जोर दिया कि इन संबंधों की नींव परस्पर विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित है।
अमेरिका ने हाल ही में अधिकांश भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया, जिसमें 25 प्रतिशत पारस्परिक आधार शुल्क और रूस से तेल व रक्षा उपकरणों की खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल था। उसने आरोप लगाया कि भारत की खरीदारी सीधे तौर पर रूस को फायदा पहुंचा रही है और यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच रही है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार और राजनीतिक दबाव का हिस्सा बताया। भारतीय अधिकारियों ने साफ कहा कि तेल आयात राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत के अनुसार जारी रहेगा। हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स ने संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा मतभेदों के बावजूद भविष्य में दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बनी हुई है।
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