बीएमसी चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। । भाजपा ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका में बड़ी जीत के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर लिया, वहीं यह चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है। 23 दिसंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही बीएमसी सहित राज्य की 29 नगर निगमों में सत्ता की जंग खुलकर सामने आ गई है।
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बीएमसी चुनाव बना सियासी रणक्षेत्र, भाजपा आक्रामक तो उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा दांव पर
हाल ही में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में मिली शानदार जीत ने महायुति का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। इन नतीजों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिससे शहरी सीटों के बंटवारे में उसकी स्थिति मजबूत हुई है। बीएमसी में महायुति का बड़ा टारगेट, 150+ सीटों पर जीत का लक्ष्य मुंबई में महायुति का मुख्य फोकस बीएमसी पर है, जहां 227 सीटों में से 150 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा गया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच अधिकांश सीटों पर सहमति बन चुकी है, जबकि कुछ सीटों पर चर्चा जारी है।
इस रणनीति का एक बड़ा संकेत यह भी है कि मुंबई में अजित पवार की एनसीपी को महायुति से बाहर रखा जा रहा है। नवाब मलिक से जुड़े विवादों के चलते भाजपा और शिंदे गुट किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं। वहीं पुणे, ठाणे और नासिक में महायुति की रणनीति अलग-अलग है। कहीं ‘फ्रेंडली फाइट’ का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है तो कहीं अंदरूनी मुकाबले की आशंका बनी हुई है।


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