प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन की अनदेखी से जुड़े मामलों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दोबारा कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी। इस आदेश में केजरीवाल को दो मामलों में बरी किया गया था। ये मामले दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले की जांच से संबंधित हैं। खास तौर पर, ये समन का पालन नहीं करने के आरोपों पर आधारित थे।
हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी, लेकिन अब ईडी इस फैसले की कानूनी समीक्षा चाहती है। इसके अलावा, एजेंसी का कहना है कि समन का जवाब देना कानूनी जिम्मेदारी है। इसलिए, वह उच्च अदालत में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। वहीं, इस कदम से मामला फिर चर्चा में आ गया है। अगर हाईकोर्ट अपील स्वीकार करता है, तो आगे विस्तृत सुनवाई हो सकती है। इसी के साथ, दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है।
समन मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती
ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि एजेंसी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी। इसी साल 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि समन के अनुपालन न करने के आधार पर दर्ज मामलों में अभियोजन पक्ष पर्याप्त रूप से आरोप स्थापित नहीं कर पाया। इसके बाद ईडी ने उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
एजेंसी का कहना है कि जांच प्रक्रिया में सहयोग करना हर संबंधित व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी होती है और समन की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ईडी का तर्क है कि यदि समन की अवहेलना को बिना कानूनी परिणाम के छोड़ दिया जाता है, तो इससे जांच एजेंसियों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए एजेंसी चाहती है कि उच्च अदालत इस पूरे प्रकरण की कानूनी समीक्षा करे और ट्रायल कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।
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हाईकोर्ट में याचिका वापस
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से जुड़े समन को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वे इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, क्योंकि जिन मामलों में समन की अनदेखी का आरोप था, उनमें ट्रायल कोर्ट पहले ही उन्हें बरी कर चुका है। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।
वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि जब संबंधित मामलों में राहत मिल चुकी है, तब समन को चुनौती देने की याचिका पर आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं रह जाती। हालांकि, ईडी द्वारा अपील दायर करने के संकेत के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ सकता है। यदि उच्च अदालत में अपील स्वीकार होती है, तो आने वाले समय में इस मामले में विस्तृत सुनवाई और नई दलीलों की संभावना बनी रहेगी।
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