साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए अहम रहा, लेकिन यह कांग्रेस पार्टी के लिए निराशा और झटकों से भरा साबित हुआ। इस वर्ष देश के दो राज्यों—दिल्ली और बिहार—में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा। फरवरी 2025 में दिल्ली और नवंबर 2025 में बिहार में हुए चुनावों ने पार्टी की कमजोर स्थिति को साफ तौर पर उजागर कर दिया।
दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा राजनीतिक लाभ मिला। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को हराकर 27 साल बाद सत्ता में जोरदार वापसी की। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में बीजेपी ने 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि आम आदमी पार्टी 22 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस ने सभी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतने में असफल रही। यह लगातार तीसरा मौका रहा जब कांग्रेस दिल्ली विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी।
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दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन, 313 में सिर्फ 6 सीटों पर सिमटी पार्टी
बिहार विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया और एक बार फिर सरकार बनाई। कांग्रेस ने महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी सिर्फ 6 सीटें ही जीत सकी। यह परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
इन दोनों राज्यों के चुनाव नतीजों को मिलाकर देखा जाए तो 2025 में कुल 313 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिलीं। दिल्ली में शून्य और बिहार में मात्र 6 सीटों का आंकड़ा पार्टी के गिरते राजनीतिक ग्राफ को दर्शाता है। चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और रणनीति पर सवाल उठाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनावों ने बीजेपी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे को नई मजबूती दी है। लगातार कमजोर होते प्रदर्शन ने कांग्रेस के सामने संगठनात्मक सुधार, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिन्हें सुलझाना पार्टी के लिए आने वाले समय में बेहद जरूरी होगा।
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