वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने उस समय बजट पेश किया, जब वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और चौथी सबसे बड़ी है, और विकास दर में दुनिया में सबसे तेज है। हालांकि, बजट पर विभिन्न नेताओं की आलोचनाएँ सामने आईं, जैसे अखिलेश यादव ने इसे सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों के लिए बताया, मल्लिकार्जुन खरगे ने SC-ST और OBC के लिए उपेक्षा की बात की, और ममता बनर्जी ने इसे बेकार करार दिया। यह बजट आलोचना का परंपरागत तरीका बन चुका है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह पारंपरिक बजट से अलग है। यह बजट सरकार की नीतियों और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए भारत को हथियार, फाइटर जेट्स, सेमी-कंडक्टर्स, और माइक्रोचिप्स के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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ट्रंप के टैरिफ के बाद वैश्विक बदलाव से भारत के उत्पादों की मांग बढ़ी है, और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है। इसे समर्थन देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बजट में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मेटल्स हब का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि यह बजट आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए है, जो ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। बजट में 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, 20 नए जलमार्ग और औद्योगिक हब बनाने की योजना है। रक्षा बजट में 15% की वृद्धि के साथ सेनाओं के आधुनिकीकरण और नए हथियारों के विकास पर जोर दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत के लिए मोदी सरकार के बड़े कदम
शहरों पर बढ़ते दबाव, जैसे प्रदूषण, परिवहन और आवास की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने छोटे शहरों को सशक्त बनाने, हाई स्पीड कॉरिडोर, आयुर्वेदिक अस्पताल और परंपरागत चिकित्सा पर जोर देने की योजना बनाई है, ताकि शहरों में जीवन को बेहतर और आसान बनाया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेषता यह है कि वे संकट से सीखते हैं और आपदा को अवसर में बदलते हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्हें यह समझ में आया कि भारत को अपनी कई चीजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता को कम करने की जरूरत है। ट्रंप के टैरिफ, चीन के व्यापार विवाद और ऑपरेशन सिंदूर ने यह सोच और मजबूत की कि भारत को आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। अब भारत को सेमीकंडक्टर, AI, रक्षा उपकरण और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सके।
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