कांग्रेस और आरजेडी के बीच बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीट बंटवारे पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। महागठबंधन के भीतर बैठकों का सिलसिला जारी है, लेकिन अब मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने तेजस्वी यादव को 12 अक्टूबर तक सीटों का फाइनल करने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि अगर उस तारीख तक समझौता नहीं हुआ, तो वह 13 अक्टूबर से अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर देगी। यह सख्त रुख महागठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव को और गहरा कर रहा है।
कांग्रेस ने तेजस्वी पर बढ़ाया दबाव, दी 12 अक्टूबर की समय सीमा
आरजेडी को स्पष्ट संदेश दिया है कि सीट बंटवारे में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी और कांग्रेस के बीच बातचीत लगातार अटक रही है, जिससे माहौल और गरम हो गया है। पार्टी ने साफ कहा कि अगर 12 अक्टूबर तक सीटों पर सहमति नहीं बनती, तो वह अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर देगी। इसी बीच कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी आज ऑनलाइन बैठक कर उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने वाली है। 11 अक्टूबर को केंद्रीय चुनाव समिति उस सूची को मंजूरी देगी। यह कदम बताता है कि कांग्रेस अब आरजेडी के फैसले का इंतजार ज़्यादा दिन नहीं करेगी।
सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं। कांग्रेस अपनी कुछ कमजोर सीटों के बदले बिस्फी, बिहार शरीफ और निर्मली जैसी सीटें चाहती है, जो वर्तमान में सहयोगी दलों के खाते में हैं। वहीं, आरजेडी कांग्रेस से कहलगांव सीट की मांग कर रही है, लेकिन कांग्रेस इसे छोड़ने को तैयार नहीं है। इसी तरह आरजेडी ने वाम दलों से भी चार सीटें मांगी हैं, जिनमें पालीगंज, घोसी और तरारी जैसी सिटिंग सीटें शामिल हैं। माले ने इसके बदले आरजेडी की इमामगंज समेत तीन सीटों पर दावा ठोक दिया है। इससे साफ है कि महागठबंधन के भीतर सीटों पर सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा।
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कांग्रेस नेताओं की तेजस्वी से मुलाकात नहीं हो सकी
वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और अधीर रंजन चौधरी एक दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे थे। हालांकि, इन नेताओं की लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात नहीं हो सकी। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस की नाराज़गी का संकेत माना जा रहा है। पार्टी चाहती है कि आरजेडी अपनी स्थिति स्पष्ट करे और सीट बंटवारे पर जल्द फैसला ले। वहीं, तेजस्वी यादव फिलहाल सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन कांग्रेस का सख्त रवैया उन्हें मुश्किल में डाल रहा है।
महागठबंधन के भीतर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। तेजस्वी यादव के साथ देर रात हुई बैठक में भी कोई सहमति नहीं बन सकी। सहनी ने 20 सीटों की मांग रखी है, जबकि आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल केवल 12 से 15 सीटें देने को तैयार हैं। सीट बंटवारे को लेकर जारी यह रस्साकशी साफ दिखा रही है कि महागठबंधन में अंदरूनी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो यह चुनावी गठबंधन के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
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