पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कर्सियांग से भाजपा विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने गुरुवार को पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया। उन्होंने कोलकाता के तृणमूल भवन में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु और महिला एवं शिशु कल्याण मंत्री डॉ. शशि पांजा भी मौजूद रहे, जिन्होंने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। शर्मा के इस कदम को चुनाव से पहले भाजपा के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
विष्णु प्रसाद शर्मा काफी समय से भाजपा नेतृत्व से नाराज चल रहे थे और दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट के खिलाफ खुलकर विरोध जता रहे थे। उन्होंने राजू बिष्ट को “बाहरी नेता” बताते हुए उन पर स्थानीय मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें चुनाव में करारी हार मिली और उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी।
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भाजपा से असंतोष बढ़ा
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक बने शर्मा धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनाने लगे थे। उन्होंने कई बार आरोप लगाया कि भाजपा ने क्षेत्रीय लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के वादे तो किए, लेकिन जमीन पर काम नहीं किया। उनका कहना था कि पहाड़ी इलाकों के विकास और स्थानीय समस्याओं पर पार्टी ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे वे लगातार निराश होते गए।
शर्मा अलग गोरखालैंड राज्य की मांग के मुखर समर्थक रहे हैं और इस मुद्दे को लेकर वे लगातार सक्रिय रहे। उनका मानना था कि दार्जिलिंग हिल्स और आसपास के क्षेत्रों के लिए अलग राज्य जरूरी है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो सके और विकास कार्यों को गति मिल सके। इसी मुद्दे पर भी वे भाजपा से असंतुष्ट थे, क्योंकि पार्टी ने इस मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
भाजपा ने दावे को किया खारिज
भाजपा विधानसभा के चीफ व्हिप शंकर घोष ने शर्मा के पार्टी छोड़ने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में उनका कोई मजबूत जनाधार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि शर्मा लंबे समय से पार्टी के संपर्क में नहीं थे और उनका जाना पार्टी के लिए कोई बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि शर्मा का दलबदल व्यक्तिगत असंतोष का परिणाम है और इससे पार्टी की चुनावी रणनीति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव अगले दो महीनों में होने की संभावना है और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है। ऐसे समय में भाजपा विधायक का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इस दलबदल से उत्तर बंगाल के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और चुनावी माहौल में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
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