बांग्लादेश का माहौल अब पहले जैसा नहीं रहा. यह अब ऐसा पड़ोसी देश नहीं है जो अपनी आजादी के लिए भारत का आभारी महसूस करे. एक आंदोलन, एक तख्तापलट और एक निर्वासन के बाद, बांग्लादेश ने अपनी नीतियों में बदलाव कर लिया है. भारत से दूरी बढ़ाते हुए, वह अब चीन के करीब जाता नजर आ रहा है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेता मुहम्मद यूनुस ने शुक्रवार, 28 मार्च को बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संदेश था. यह संकेत था कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में अब पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही, भारत की प्राथमिकता घट गई है, और बांग्लादेश पुराने संबंधों को पीछे छोड़ते हुए नए साझेदार की ओर बढ़ रहा है.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक टॉप अधिकारी ने मंगलवार को कहा था कि यूनुस ने अपनी पहली राजकीय यात्रा के लिये चीन को चुना है और इस तरह बांग्लादेश “एक संदेश भेज रहा है”.
Also read: पप्पू यादव को ओम बिरला ने दी फटकार, सदन की मर्यादा की याद दिलाई
बढ़ती आंतरिक विभाजन से उत्पन्न चुनौतियाँ और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
बांग्लादेश के लीडर की यह चीन यात्रा भारत को क्या संदेश देने की कोशिश है और बांग्लादेश में जो स्थितियां पैदा हुई हैं, उसका भारत की सुरक्षा पर क्या असर हो सकता है. इस सवाल के जवाब को खोजने के लिए “बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के निहितार्थ” (“Implications of the Political Turmoil in Bangladesh”) नाम के एक दो-दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस हुआ. इसे मौलाना अबुल कलाम आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज, कोलकाता ने दिल्ली के इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया था.
Also read: बिल गेट्स की भविष्यवाणी: ये 3 नौकरियां AI कभी नहीं छीन पाएगा
इस कॉन्फ्रेस में सीमा जागरण मंच, भारत के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एन. कोहली ने कहा कि इस समय बांग्लादेश में जो भारत विरोधी नैरेटिव फैला हुआ है, वह चिंता का विषय है. शेख हसीना सरकार के वक्त भी वहां की किताबों में बिना जोर दिए ऐसे नैरेटिव पुश किए जाते थे लेकिन सत्ता बदलने के साथ यह खुले रूप में हो रहा है. एक तरफ तो छात्रों ने जो पार्टियां बनाई हैं, वो पावरफुल हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर सेना के अंदर भी कई खेमें नजर आ रहे हैं.
Also read: साउथ कोरिया कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा बेबी ‘सप्लायर’
बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता: भारत की सुरक्षा पर प्रभाव और क्षेत्रीय चुनौतियाँ
वहीं मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान, नई दिल्ली से आईं डॉ. स्मृति एस.पटनायक ने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश के अंदर जैसे-जैसे आंतरिक विभाजन बढ़ेगा, भारत के लिए चुनौतियां बड़ी होती जाएंगी. वहां सत्ता परिवर्तन के बाद से पाकिस्तान और चीन को स्पेस मिला है और भारत के पड़ोस में ऐसा होना परेशानी का सबब है. उनका मानना है कि कई एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत को बांग्लादेश के हरेक स्टेकहोल्डर्स को साथ लेकर चलना चाहिए, सबको कॉन्फिंडेस में लेना चाहिए. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वो सभी भारत से बात करने को तैयार हैं भी?
एक अस्थिर बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा को भी अस्थिर बनाता है. जो काफी हद तक बिना फेंसिंग (तारों के) है. बॉर्डर अवैध माइग्रेशन के प्रति संवेदनशील है. अपराध और तस्करी नेटवर्क अपनी पहुंच का विस्तार कर सकते हैं.


More Stories
Climate Meets Technology: Advancing Innovation for a Sustainable Future
James Dyson Award 2026: Indian Student Designs Electric Vehicle for Security Patrols
बस हादसे के बाद खुली पोल, ग्रेटर नोएडा में 1.55 लाख का चालान और सुरक्षा इंतजामों की कमी