ट्रंप ने लगभग सभी देशों पर 10% या उससे अधिक टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसमें भारत, ब्रिटेन और जापान जैसे सहयोगी भी शामिल हैं, जबकि रूस, क्यूबा और उत्तर कोरिया को छूट दी गई।
ट्रंप का टैरिफ फैसला: सहयोगियों पर सख्ती, दुश्मनों पर रियायत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने लगभग पूरी दुनिया पर कम से कम 10 परसेंट टैरिफ लगाने की घोषणा की. ट्रंप ने अपने टैरिफ में दूर-दराज के छोटे द्वीप देशों को भी शामिल किया है. भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे सहयोगियों को भी उन्होंने नहीं बख्शा. लेकिन दुनिया तब हैरान रह गई, जब ट्रंप ने अपने कट्टर दुश्मनों पर नरमी दिखाई. रूस, क्यूबा, बेलारूस, और उत्तर कोरिया जैसे देशों को इस नए टैरिफ से छूट दी गई है. ट्रंप की लिस्ट में एक पैटर्न देखने को मिला है. वह यह कि जो देश जितना टैरिफ अमेरिका पर लगाता है, ट्रंप ने उसका आधा टैरिफ लगा दिया है. अफगानिस्तान 49 फीसदी टैरिफ लगाता है, उस हिसाब से उस पर 25 फीसदी टैरिफ लगना चाहिए था. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उस पर सिर्फ 10 फीसदी टैरिफ लगाया.
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अमेरिका की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि रूस को टैरिफ लिस्ट से बाहर रखा गया क्योंकि मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध पहले से ही वहां ‘व्यापार को रोकते हैं.’ हालांकि, अमेरिका मॉरीशस और ब्रुनेई जैसे देशों की तुलना में रूस के साथ अधिक व्यापार करता है, फिर भी इन पर टैरिफ लगाया गया है. हालांकि, कनाडा और मेक्सिको जैसे करीबी सहयोगियों को भी इस बार नए टैरिफ से छूट मिली है, लेकिन यह इसलिए क्योंकि ट्रंप ने इन पर पहले ही 25% टैरिफ लगा रखा है.
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युद्ध रोकने पर हो रही बात
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही सीजफायर वार्ता आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। रूस ने कुछ प्रतिबंध हटाने की मांग की है। इस सप्ताह की शुरुआत में, अमेरिका ने रूसी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ की धमकी दी थी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर हालिया बयानों से नाराजगी जताई थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस-अमेरिका व्यापार में भारी गिरावट देखी गई है. अमेरिका और रूस के बीच 2021 में दोनों देशों के बीच 35 बिलियन डॉलर का व्यापार था, जो पिछले साल प्रतिबंधों के कारण घटकर 3.5 बिलियन डॉलर रह गया.. लेविट ने कहा है कि रूस को लेकर और भी ज्यादा सख्त कदम अमेरिका उठा सकता है.

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