3 सितंबर को 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सराहे गए बड़े बदलाव किए गए। बैठक में 12 और 28 प्रतिशत कर दरों को खत्म कर दो नए स्लैब—5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत—में तर्कसंगत बनाने का फैसला लिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य आम लोगों को राहत देना और कर ढांचे को सरल व पारदर्शी बनाना है। 5 प्रतिशत स्लैब में खाद्य पदार्थ, डेयरी उत्पाद, रसोई के सामान, कृषि उपकरण और चिकित्सा किट जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल की गईं। वहीं, 18 प्रतिशत स्लैब में अधिकांश उपभोक्ता वस्तुएं, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान को रखा गया। इसके अलावा, तंबाकू, पान मसाला, लक्जरी कारें और हेलीकॉप्टर जैसी विलासिता व अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर लगेगा, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कुछ जरूरी सेवाएं पूरी तरह जीएसटी से मुक्त रहेंगी।
शशि थरूर ने बताया अधिक निष्पक्ष सुधार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हालिया सुधारों की सराहना करते हुए इन्हें आम लोगों के लिए लाभकारी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी कई वर्षों से जीएसटी दरों को कम और सरल बनाने की मांग करती रही है। थरूर का मानना है कि पहले चार स्लैब प्रणाली जटिल और भ्रामक थी, जिससे जनता असंतुष्ट रहती थी। नई व्यवस्था को उन्होंने अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए कहा कि दो स्लैब में कर संरचना आम जनता को राहत देगी और सभी वर्गों के लिए बेहतर साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सुधार लंबे समय से चली आ रही कर प्रणाली की खामियों को दूर करेगा और करदाताओं का बोझ हल्का करेगा।
इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही दबाव में आकर जीएसटी सुधार लागू किए गए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और भारतीय निर्यात पर लगाए गए टैरिफ ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाया। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि गुटनिरपेक्ष नीति से भटककर सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुक रही है। उनका कहना था कि अगर जनता का हित वास्तव में प्राथमिकता होती, तो यह सुधार बहुत पहले लागू हो जाते, न कि चुनाव से ठीक पहले।
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