राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से APO (Awaiting Posting Orders) में भेज दिया है। कार्मिक विभाग ने बुधवार देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया। सरकार ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें अगले आदेश तक पोस्टिंग का इंतजार करने को कहा है। अग्रवाल 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं और उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर तैनात थे। यह कार्रवाई उनके परिवार की संपत्ति खरीद को लेकर उठे सवालों के बीच हुई है।
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40 विला और कॉटेज की खरीद को लेकर विवाद
शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वे मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। APO में भेजे जाने से पहले वे उद्योग, MSME, राज्य उपक्रम और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके अलावा वे RIICO के चेयरमैन और RAJSICO के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जैसे पदों पर भी कार्यरत थे। सरकार के इस फैसले के बाद उनके सभी संबंधित पदों की जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है।
एक मीडिया संस्थान की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने लगभग ढाई साल के भीतर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदे। रिपोर्ट में उनकी पत्नी, वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों की संपत्ति खरीद का भी उल्लेख किया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद अधिकारी और उनके परिवार की संपत्ति को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, संपत्ति खरीद से जुड़े आरोपों और उनके आधार की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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सरकार ने जारी किया APO का आदेश
राजस्थान के कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश पर संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए। आदेश में कहा गया कि 1993 बैच के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक APO में रखा जाता है। मीडिया रिपोर्ट में संपत्ति खरीद से जुड़े खुलासों के बाद सरकार की इस कार्रवाई ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। अग्रवाल फिलहाल अपने बच्चों के पास अमेरिका में बताए जा रहे हैं। उनकी IPS पत्नी के खिलाफ इस मामले में किसी अलग आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। शिखर अग्रवाल पहले मुख्यमंत्री कार्यालय सहित कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ऐसे में संपत्ति खरीद से जुड़ा विवाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, APO में भेजना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता। मामले में आगे की कार्रवाई और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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