वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने CJP आंदोलन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में चल रहे इस आंदोलन को विदेशों से आर्थिक मदद मिल रही है। साथ ही, उन्होंने आशंका जताई कि कुछ विदेशी ताकतें भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहती हैं। साल्वे के इन बयानों ने आंदोलन की फंडिंग और इसके पीछे कथित विदेशी प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्यों की आवश्यकता है।
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अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों का भी किया जिक्र
हरीश साल्वे ने अपने बयान में अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी देश भारत से खुश नहीं हैं। इस संदर्भ में उन्होंने अमेरिका की ओर विशेष रूप से इशारा किया। साल्वे ने भारत के वित्त मंत्री के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में रुकावट की बात सामने आई थी। उन्होंने अन्य देशों के साथ भारत के बढ़ते व्यापारिक समझौतों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जारी तनाव को देश के भीतर चल रहे घटनाक्रमों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
साल्वे ने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि इन देशों में अस्थिरता के पीछे किन ताकतों की भूमिका रही। बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता से विदाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि बाहरी ताकतें भारत में भी इसी तरह की परिस्थितियां पैदा करना चाहती हैं। हालांकि, इन देशों के राजनीतिक घटनाक्रमों के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका को लेकर उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
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CJP से जुड़े लोगों की भूमिका और फंडिंग पर उठाए सवाल
CJP आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों का जिक्र करते हुए साल्वे ने उनकी पहचान, गतिविधियों और आर्थिक स्रोतों पर सवाल उठाए। उन्होंने दीपके जी और सौरव दास सहित कुछ लोगों का उल्लेख किया। साल्वे ने पूछा कि इन लोगों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है और उनकी भूमिका क्या है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले छह से आठ महीनों में एक खास तरह का पैटर्न दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, कुछ ताकतें मौजूदा सरकार पर दबाव बनाना चाहती हैं। हालांकि, आंदोलन से जुड़े लोगों की फंडिंग या विदेशी संबंधों के बारे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं।
हरीश साल्वे ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे मामलों से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कुछ ताकतें मौजूदा सरकार को हटाकर अपनी पसंद के लोगों को सत्ता में लाना चाहती हैं। साल्वे का मानना है कि हाल के महीनों में सामने आए घटनाक्रमों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। हरीश साल्वे देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह 1999 से 2002 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल रहे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव मामले में भारत का पक्ष रखा था। इसके अलावा, वह वोडाफोन कर विवाद जैसे कई चर्चित कानूनी मामलों से भी जुड़े रहे हैं। वर्ष 2015 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।


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