July 4, 2026

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ममता बनर्जी

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने TMC के सभी संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी मानी जाने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद सहित सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे ममता बनर्जी को भेजा। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।

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प्रदेश अध्यक्ष बनने के एक महीने बाद ही दिया इस्तीफा

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के महज एक महीने के भीतर इस्तीफा दे दिया। ममता बनर्जी ने उन्हें पिछले महीने 3 तारीख को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया था। इतनी कम अवधि में उनका पद छोड़ना पार्टी नेतृत्व के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे की विस्तृत वजह नहीं बताई है। अब सभी की नजर पार्टी के अगले कदम पर टिकी हुई है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से ममता बनर्जी की भरोसेमंद सहयोगी रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार में वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भूमि सुधार, शरणार्थी और पुनर्वास जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने कानून के क्षेत्र में भी काम किया है। उनकी पहचान एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में रही है। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

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TMC में बढ़ती अंदरूनी कलह ने बढ़ाई ममता की चुनौती

हाल के समय में तृणमूल कांग्रेस लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली है। कुछ नेताओं ने अलग गुट बनाकर नई राजनीतिक दिशा अपनाने की कोशिश भी की है। ऐसे माहौल में चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों की ओर इशारा करता है। इससे विपक्ष को भी सरकार और पार्टी पर निशाना साधने का अवसर मिल सकता है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य से पहले भी कई सांसद और वरिष्ठ नेता पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती पर असर डाल सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इन चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं और पार्टी को दोबारा एकजुट करने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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