श्रीराम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का निधन हो गया है। उन्होंने 87 वर्ष की आयु में लखनऊ के एसजीपीजीआई में अपनी अंतिम सांस ली। तीन फरवरी को ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। आचार्य सत्येंद्र दास गंभीर हालत में एसजीपीजीआई के न्यूरोलॉजी वार्ड के एचडीयू में भर्ती थे। आचार्य के निधन पर अयोध्या के मठ मंदिरों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार कल अयोध्या में सरयू नदी के किनारे किया जाएगा।
32 वर्षों तक राम मंदिर की निस्वार्थ सेवा
आचार्य सत्येंद्र दास ने करीब 32 वर्षों तक राम मंदिर की सेवा में की। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बाबरी विध्वंस से लेकर राममंदिर के निर्माण तक के साक्षी रहे हैं। रामलला की भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा भी उन्होंने अपनी आंखों से देखी है। आचार्य सत्येंद्र दास ने टेंट में रहे रामलला की 28 साल तक उपासना-पूजा की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद करीब चार साल तक अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला की सेवा मुख्य पुजारी के रूप में की। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अभी तक वह मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे थे।
1992 में मिलते थे 100 रुपये
आपको बता दें कि फरवरी 1992 में जब ‘विवादित जमीन’ के कारण राम जन्मभूमि की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के पास चली गई थी। एक मार्च 1992 को भाजपा सांसद विनय कटियार, विश्व हिंदू परिषद के नेता और उस समय चीफ रहे अशोक सिंघल की सहमति से आचार्य सत्येंद्र दास की नियुक्ति की गई थी। 1992 में जब सत्येंद्र दास की राम मंदिर में नियुक्ति हुई थी तो उस समय उन्हें वेतन के रुप में हर माह 100 रुपये मिलते थे। साल 2019 में अयोध्या के कमिश्नर के निर्देश के बाद सत्येंद्र दास का वेतन 13 हजार किया गया था।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38500 रुपये हो गया था। इस समय राममंदिर में आचार्य सत्येंद्र दास समेत कुल 14 पुजारी सेवा दे रहे थे। सत्येंद्र दास के साथ चार सहायक पुजारी भी लंबे समय से राममंदिर में कार्यरत हैं, जबकि नौ नए पुजारियों की नियुक्ति हाल ही में की गई थी।


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