पिछले दिनों देश के एविएशन सेक्टर में अचानक हलचल देखने को मिली। दरअसल, इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें अलग-अलग कारणों से रद्द होने लगीं। इसके चलते आम यात्रियों को काफी परेशानी हुई। वहीं, सरकार के सामने भी स्थिति संभालना चुनौती बन गई। हालांकि, कुछ ही दिनों में हालात सामान्य हो गए। लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ। सवाल यह था कि क्या देश में सीमित एयरलाइंस होने से यह संकट पैदा हुआ।
इसी कारण, सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। इसके बाद नई एयरलाइंस को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज की गई। इसी क्रम में शंख एयरलाइंस को हाल ही में एनओसी दी गई है। ऐसे में अब इसके विमान जल्द ही उड़ान भरते नजर आ सकते हैं।
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टेंपो से ट्रांसपोर्ट तक का सफर
शंख एयरलाइंस के पीछे की कहानी काफी प्रेरणादायक है। दरअसल, उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। आज वे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में जाना-पहचाना नाम हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब आर्थिक तंगी के चलते उन्हें टेंपो और ऑटो चलाने पड़े। लगभग एक साल तक उन्होंने कानपुर में अपने दोस्तों के साथ मिलकर टेंपो चलाया।
हालांकि, श्रवण मानते हैं कि इस संघर्ष ने उन्हें मजबूत बनाया। इसके बाद वे कानपुर से लखनऊ शिफ्ट हो गए। यहीं से उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई। धीरे-धीरे उन्होंने माइनिंग, सीमेंट और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा। नतीजतन, उन्हें लगातार सफलता मिलती चली गई।
एविएशन में एंट्री और आगे की योजना
शुरुआती दौर में श्रवण कुमार की पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई थी। उनका मन पढ़ाई में भी कम लगता था। पहले उन्होंने कुछ छोटे व्यवसाय शुरू किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद साल 2015 में उन्होंने सीमेंट कारोबार की शुरुआत की। यहीं से उनकी किस्मत ने करवट ली। बाद में वे टीएमटी और माइनिंग सेक्टर में भी उतरे।
इसके बाद उन्होंने ट्रांसपोर्ट बिजनेस का विस्तार किया। फिलहाल उनके पास 400 से ज्यादा ट्रकों की फ्लीट है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने एविएशन सेक्टर में कदम रखने का फैसला किया। उनका कहना है कि इस सेक्टर में उधारी नहीं होती। इसलिए कैशफ्लो बेहतर रहता है। साथ ही, यहां प्रतिस्पर्धा भी सीमित है।
श्रवण का दावा है कि उनकी एयरलाइंस में किराए बार-बार नहीं बदले जाएंगे। सुबह जो किराया होगा, वही शाम तक रहेगा। शुरुआत में कंपनी एयरबस के कुछ विमानों के साथ घरेलू उड़ानें शुरू करेगी। आगे चलकर विमानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके बाद आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी शुरुआत करने की योजना है।
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