रेल पटरियों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है। रेलवे ने जिन ट्रैक मेंटेनरों को पटरियों की निगरानी के लिए नियुक्त किया है, उनमें से कई को दफ्तरों और अधिकारियों के घरों में ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया है। इसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि जब ट्रैक की निगरानी के जिम्मेदार कर्मचारी पटरियों पर नहीं बल्कि ऑफिसों में चाय-पानी पर लगे हैं, तो असल निगरानी कौन कर रहा है?
रेलवे विभाग ने ट्रैक मेंटेनरों को पटरियों की स्थिति जांचने, समय-समय पर मरम्मत करने और किसी भी संभावित खतरे से पहले ही अलर्ट करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन कुछ विभागीय रिपोर्ट्स और कर्मचारियों की शिकायतों ने खुलासा किया है कि कई मेंटेनर अधिकारियों के निजी कार्यों में व्यस्त हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
इस स्थिति ने यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर पटरियों की सही तरीके से निगरानी नहीं हुई, तो इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े इस गैर-पेशेवर रवैये को लेकर यूनियनों ने भी नाराजगी जताई है। यूनियन नेताओं ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि मेंटेनरों को तुरंत उनके असली कार्यक्षेत्र यानी पटरियों पर तैनात किया जाए।
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रेलवे बोर्ड ने भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और संबंधित ज़ोनल अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। कुछ क्षेत्रों में आंतरिक जांच शुरू हो चुकी है और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
रेलवे मंत्रालय का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा, ताकि ट्रेनों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।


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