निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन करीब 19 साल बाद शुक्रवार को कोलकाता पहुंचीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने पहुंचे लोगों का उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोलकाता लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अपने ही देश वापस आ गई हों। उन्होंने इस यात्रा को भावुक और यादगार पल बताया। उनकी वापसी ने साहित्य और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा तेज कर दी है।
वापसी के साथ अभिव्यक्ति की आजादी और धर्मनिरपेक्षता पर फिर शुरू हुई बहस
तसलीमा नसरीन शनिवार को रवींद्र सदन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। यह कार्यक्रम धार्मिक कट्टरवाद के विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर केंद्रित है। कार्यक्रम में वह कविता पाठ भी करेंगी और कई साहित्यकार व प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन उनके साहित्यिक योगदान और विचारों के सम्मान के लिए किया जा रहा है। हालांकि, उनकी मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कोलकाता पहुंचने से पहले तसलीमा ने कहा कि बंगाल हमेशा उनके दिल के करीब रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश छोड़ने के बाद उन्होंने कोलकाता को अपना दूसरा घर माना। उनके अनुसार, सीमाएं लोगों के दिलों को अलग नहीं कर सकतीं और बंगाल उनके लिए हमेशा एक ही सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस वापसी में खुशी के साथ पुरानी यादों का दर्द भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस शहर ने उन्हें अपनापन, दोस्त और पाठक दिए थे।
Also Read : उदयपुर में ज्वैलरी शोरूम से करीब 1 करोड़ के गहनों की चोरी, CCTV में कैद हुई वारदात
करीब दो दशक बाद कोलकाता पहुंचीं तसलीमा नसरीन
तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी वापसी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आवाज की भी वापसी है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों और पश्चिम बंगाल सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लेखक के लिए स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखना उसका मूल अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक समाज में लेखकों की अभिव्यक्ति का सम्मान होना चाहिए। उनकी टिप्पणी के बाद अभिव्यक्ति की आजादी पर फिर से बहस शुरू हो गई है।
तसलीमा नसरीन को वर्ष 1994 में अपने उपन्यास ‘लज्जा’ के कारण बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कोलकाता को अपना ठिकाना बनाया, लेकिन 2007 में विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा। बाद में वह विदेश चली गईं और लंबे समय तक कोलकाता नहीं लौट सकीं। अब करीब 19 साल बाद उनकी वापसी को पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विमर्श के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।


More Stories
A.R. Rahman Recalls Fan Who Predicted His Ramayana Collaboration 12 Years Ago
दिलजीत दोसांझ के शो के लिए दिल्ली पुलिस ने नहीं दी परमिशन, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में होना था शो
टाइगर श्रॉफ केस: वारदात से पहले शूटरों ने की थी फायरिंग की प्रैक्टिस, हुआ था मिसफायर।